प्रकाशित: 22 नवंबर 2025PIBशासन
HECI विधेयक 2025: UGC, AICTE, NCTE की जगह एकल उच्च शिक्षा नियामक
उच्च शिक्षा आयोग भारत (HECI) विधेयक 2025 को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है। स्वतंत्रता के बाद भारत की उच्च शिक्षा नियामक व्यवस्था में यह सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है। NEP 2020 के तहत प्रस्तावित इस विधेयक में तीन मौजूदा नियामकों — UGC, AICTE और NCTE — को भंग करके उनकी जगह एक एकीकृत निकाय बनाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित HECI संरचना में चार अलग-अलग खंड होंगे: शैक्षणिक मानकों के लिए NHERC; मान्यता के लिए NAC; स्नातक गुण मानक निर्धारित करने के लिए GEC; और अनुदान प्रबंधन के लिए HEGC।
HECI के पीछे तर्क यह है कि कई नियामकों के कारण संस्थानों को जिस बिखरी हुई और कई बार परस्पर विरोधी निगरानी का सामना करना पड़ता है, उसे समाप्त किया जाए। इस विधेयक में ऐसे गैर-अनुपालक संस्थानों को दंडित करने के प्रावधान भी हैं, जो निर्धारित शैक्षणिक, बुनियादी ढाँचे या वित्तीय मानकों को पूरा करने में विफल रहते हैं।
आलोचकों ने नियामक शक्ति के केंद्रीकरण और राज्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को संभावित नुकसान पर चिंता जताई है। हालाँकि, समर्थकों का तर्क है कि HECI नौकरशाही बाधाओं को कम करेगा, गुणवत्ता मानकों में सुधार करेगा और भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाएगा।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: एचईसीआई विधेयक 2025 तथा यूजीसी, एआईसीटीई एवं एनसीटीई के स्थान पर एकल उच्च शिक्षा नियामक के प्रस्ताव का परीक्षण कीजिए। यह एनईपी 2020 से कैसे मेल खाता है?
उत्तर (50 शब्द):
एनईपी 2020 के तहत प्रस्तावित एचईसीआई विधेयक 2025 में यूजीसी, एआईसीटीई एवं एनसीटीई को भंग कर उनके स्थान पर एकीकृत उच्च शिक्षा आयोग बनाने का प्रस्ताव है। इसमें चार प्रकोष्ठ होंगे — नियमन के लिए एनएचईआरसी, प्रत्यायन के लिए एनएसी, स्नातक स्तर के मानकों के लिए जीईसी और अनुदान के लिए एचईजीसी। इससे नियमन की एक ही व्यवस्था बनेगी और खंडित निगरानी घटेगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
HECI विधेयक 2025 क्या है?
उच्च शिक्षा आयोग भारत (HECI) विधेयक 2025, NEP 2020 के तहत अपेक्षित है। इसमें UGC, AICTE और NCTE की जगह एक ही एकीकृत नियामक लाने का प्रस्ताव है; इसे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है।
प्रस्तावित HECI संरचना के चार खंड कौन से हैं?
(1) NHERC — राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नियामक परिषद (शैक्षणिक मानक); (2) NAC — राष्ट्रीय मान्यता परिषद; (3) GEC — सामान्य शिक्षा परिषद (स्नातक स्तर की अपेक्षित विशेषताएँ); (4) HEGC — उच्च शिक्षा अनुदान परिषद (वित्त पोषण)।
भारत को UGC, AICTE और NCTE की जगह एकल नियामक की आवश्यकता क्यों है?
वर्तमान में संस्थानों को कई नियामकों की अलग-अलग निगरानी झेलनी पड़ती है। जिस कॉलेज में इंजीनियरिंग और शिक्षा दोनों कार्यक्रम हों, उसे AICTE और NCTE दोनों के नियम अलग-अलग मानने पड़ते हैं। HECI का लक्ष्य अनुपालन के लिए एक ही व्यवस्था बनाना है।
HECI विधेयक में क्या दंडात्मक प्रावधान हैं?
विधेयक में ऐसे संस्थानों को दंडित करने के प्रावधान हैं, जो निर्धारित शैक्षणिक, बुनियादी ढाँचे या वित्तीय मानकों को पूरा नहीं करते।
HECI विधेयक की मुख्य आलोचनाएँ क्या हैं?
आलोचकों का तर्क है कि इससे नियामक शक्ति केंद्र के पास बहुत अधिक केंद्रित हो जाती है, जिससे राज्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम हो सकती है और उच्च शिक्षा शासन में सहकारी संघवाद कमजोर हो सकता है।