16 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड ने नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित उपलब्धि हासिल की। इस दिन 19-सीटर सी-प्लेन ने टिहरी झील पर सफल परीक्षण लैंडिंग पूरी की, जिसे हिमालयी राज्य में सी-प्लेन परिचालन की व्यावहारिक शुरुआत माना गया। विमान देहरादून के निकट जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से उड़ा और टिहरी झील क्षेत्र में कोटि कॉलोनी में उतरा, जिससे जलाशय की जल हवाई अड्डे के रूप में उपयुक्तता सामने आई। टिहरी झील भागीरथी और भिलंगना नदियों पर बने टिहरी बांध से बनी है। यह लगभग 1,700 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली है और एशिया की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झीलों में से एक है। यह पहले से ही 2,400 मेगावाट टिहरी जलविद्युत परिसर को संचालित करती है और दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को पेयजल आपूर्ति देती है। सी-प्लेन पहल उत्तराखंड सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के अंतर्गत टिहरी झील पर जल हवाई अड्डा विकसित करने के लिए लंबे समय से चले आ रहे समझौता ज्ञापन का परिणाम है। पुष्कर सिंह धामी सरकार चरणबद्ध तरीके से नैनीताल झील तथा अन्य प्रमुख जलाशयों तक ऐसी सेवाओं का विस्तार करने, उत्तराखंड को भारत के प्रमुख सी-प्लेन गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा इसे क्षेत्रीय पर्यटन, बर्फबारी के महीनों में चार धाम पहुँच और आपदा-राहत रसद से जोड़ने की योजना बना रही है। संचालकों ने संकेत दिया है कि नागर विमानन महानिदेशालय की नियामक मंजूरी के बाद वाणिज्यिक सेवाएँ आरंभ होंगी।