राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (एनआईयूए) के सहयोग से 13 शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं (यूआरएमपी) पूरी कर ली हैं, जो नदी-केंद्रित शहरी नियोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चरण-1 के तहत 27 शहरों और चरण-2 के तहत 33 अतिरिक्त शहरों के लिए यूआरएमपी तैयार की जा रही हैं, जिससे गंगा बेसिन में कुल शहरों की संख्या 60 तक पहुंच जाएगी। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत समर्थित यह पहल, नदी स्वास्थ्य को शहरी नियोजन के साथ एकीकृत करने के विश्व के सबसे बड़े समन्वित प्रयासों में से एक है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिसंबर 2019 में कानपुर में आयोजित राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में व्यक्त उस विजन पर आधारित है, जिसमें उन्होंने शहर-केंद्रित विकास से हटकर नदी-केंद्रित विकास अपनाने का आह्वान किया था। यूआरएमपी ढांचा तीन स्तंभों - पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक - के माध्यम से शहरी नदी प्रबंधन को संबोधित करता है, जिसके दस-सूत्री एजेंडा में बाढ़ के मैदानों का विनियमन, प्रदूषण नियंत्रण, आर्द्रभूमि एवं जल निकायों का पुनरुद्धार, नदी तट सुरक्षा, उपचारित जल का पुन: उपयोग और सतत नागरिक सहभागिता शामिल हैं। यह कार्यक्रम अयोध्या, कानपुर और छत्रपति संभाजी नगर के सफल पायलट प्रोजेक्टों पर आधारित है। विश्व बैंक के सहयोग से चरण-1 में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 27 शहर शामिल हैं; इनमें से 13 यूआरएमपी पूरी हो चुकी हैं और 12 अन्य मार्च 2027 तक पूरी होंगी। दीर्घकालिक परिकल्पना में गंगा के मुख्य मार्ग पर स्थित सभी 97 शहर शामिल हैं।