प्रकाशित: 6 दिसंबर 2025समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 लोक सभा में पेश
सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड, 2025 लोक सभा में पेश किया गया, जो भारत के बिखरे हुए प्रतिभूति कानून ढांचे को सरल और एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कोड तीन महत्वपूर्ण कानूनों को निरस्त कर एक ही कानून में लाने का प्रस्ताव करता है: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) अधिनियम, 1992; डिपॉजिटरीज अधिनियम, 1996; और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (विनियमन) अधिनियम, 1956।
यह कोड SEBI के शासन ढांचे में बड़े संरचनात्मक बदलावों का प्रस्ताव रखता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें SEBI बोर्ड को वर्तमान 9 सदस्यों से बढ़ाकर 15 सदस्य करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य नियामक क्षमता सुधारना, प्रतिनिधित्व बढ़ाना और इक्विटी, ऋण, डेरिवेटिव और कमोडिटी सहित बाजार के अलग-अलग खंडों में विशेष विशेषज्ञता जोड़ना है।
विधेयक को विस्तृत संसदीय जांच और हितधारक परामर्श के लिए वित्त पर स्थायी समिति को भेजा गया है। यह सरकार के व्यापक विधायी समेकन अभियान के अनुरूप है। समेकन से बाजार सहभागियों के लिए नियामक ओवरलैप और अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत के पूंजी बाजारों का तेजी से विस्तार हुआ है — BSE और NSE मिलकर 5,000 से अधिक कंपनियों को सूचीबद्ध करते हैं, और निवेशक खातों की संख्या 15 करोड़ को पार कर गई है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 किन तीन कानूनों को एक साथ लाने का प्रस्ताव करता है?
SEBI अधिनियम 1992, डिपॉजिटरीज अधिनियम 1996 और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (विनियमन) अधिनियम 1956।
कोड में SEBI बोर्ड के आकार को लेकर क्या बदलाव प्रस्तावित है?
SEBI बोर्ड को 9 से बढ़ाकर 15 सदस्य तक करने का प्रस्ताव है — नियामक क्षमता बढ़ाने और विशेष विशेषज्ञता लाने के लिए।
सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 को आगे की समीक्षा के लिए कहां भेजा गया है?
इसे विस्तृत संसदीय जाँच और हितधारकों से परामर्श के लिए वित्त संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया है।
प्रतिभूति कानूनों का विधायी समेकन क्यों महत्वपूर्ण है?
इससे नियामकीय दोहराव कम होता है, बाजार सहभागियों पर अनुपालन का बोझ घटता है, SEBI के अधिदेश को लेकर स्पष्टता आती है और भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनता है।
भारत के पूंजी बाजार विकास के संदर्भ में इस कोड का क्या महत्व है?
भारत के पूंजी बाजारों का तेजी से विस्तार हुआ है — BSE और NSE में मिलाकर 5,000+ कंपनियां सूचीबद्ध हैं और निवेशक खाते 15 करोड़ से अधिक हैं — इसलिए एक आधुनिक, एकीकृत नियामक ढांचा आवश्यक है।