जनजातीय गौरव वर्ष 2025 के तहत भगवान बिरसा मुंडा (1875–1900) की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 1 से 15 नवंबर तक राष्ट्रव्यापी उत्सव मनाए गए। झारखंड के मुंडा समुदाय के महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक सुधारक बिरसा मुंडा को 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) के नाम से जाना जाता है। 15 नवंबर को पूरे भारत में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। 15 दिवसीय जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़े में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले से राष्ट्रीय समारोहों का नेतृत्व किया और जनजातीय कल्याण के लिए ₹9,700 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' (महान आंदोलन) ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ भारत के सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोहों में से एक माना जाता है।
जनजातीय गौरव वर्ष 2025: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर राष्ट्रव्यापी उत्सव
जनजातीय गौरव वर्ष 2025 के तहत भगवान बिरसा मुंडा (1875–1900) की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 1 से 15 नवंबर तक राष्ट्रव्यापी उत्सव मनाए गए। झारखंड के मुंडा समुदाय के महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक सुधारक बिरसा मुंडा को 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) के नाम से जाना जाता है। 15 नवंबर को पूरे भारत में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। 15 दिवसीय जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़े में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले से राष्ट्रीय समारोहों का नेतृत्व किया और जनजातीय कल्याण के लिए ₹9,700 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' (महान आंदोलन) ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ भारत के सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोहों में से एक माना जाता है।
मुख्य तथ्य
- जनजातीय गौरव वर्ष 2025 में 1–15 नवंबर तक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई गई।
- जनजातीय समुदाय बिरसा मुंडा (1875–1900) को 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) के रूप में पूजते हैं।
- PM मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले से 9,700 करोड़ रुपये की जनजातीय परियोजनाओं से जुड़े राष्ट्रीय समारोह की अगुवाई की।
- 15 नवंबर आधिकारिक रूप से जनजातीय गौरव दिवस है, जिसे 2021 से पूरे देश में मनाया जाता है।
- बिरसा मुंडा का उलगुलान (1899–1900) भारत के शुरुआती प्रमुख जनजातीय विद्रोहों में से एक था।
- समारोहों ने जनजातीय अधिकारों और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
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जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 2025 से सही रूप से जुड़ा कथन कौन सा है?
जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 1 से 15 नवंबर 2025 तक देशभर में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया गया। यह भारत सरकार की पहल थी, जिसका केंद्र जनजातीय विरासत, जागरूकता गतिविधियां और जनजातीय समुदायों के योगदान का सम्मान था। इसलिए विकल्प A ही सही उत्तर है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिरसा मुंडा कौन थे और उन्हें 'धरती आबा' क्यों कहा जाता है?
बिरसा मुंडा (1875–1900) वर्तमान झारखंड के मुंडा समुदाय के महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक सुधारक और आध्यात्मिक नेता थे। जनजातीय समुदाय उन्हें 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) के रूप में पूजता है, क्योंकि उन्होंने उलगुलान विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन तथा शोषणकारी जमींदारों से जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
जनजातीय गौरव दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
जनजातीय गौरव दिवस प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को पूरे भारत में बिरसा मुंडा की जयंती और भारत के स्वतंत्रता संग्राम व सांस्कृतिक विरासत में जनजातीय समुदायों के योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। 2021 से यह दिवस आधिकारिक रूप से राष्ट्रव्यापी मनाया जाता है।
बिरसा मुंडा के नेतृत्व में उलगुलान विद्रोह क्या था?
उलगुलान (अर्थ: 'महान हलचल' या 'क्रांति') 1899–1900 में छोटानागपुर क्षेत्र में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुआ जनजातीय विद्रोह था। यह भारत के शुरुआती और महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोहों में से एक था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करना और जमींदारों एवं औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा हड़पे गए जनजातीय भूमि अधिकारों (मुलकीनामा) को पुनः स्थापित करना था।
जनजातीय गौरव वर्ष 2025 के समारोहों में क्या घोषणाएँ हुईं?
1–15 नवंबर को आयोजित जनजातीय गौरव वर्ष 2025 समारोहों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले से राष्ट्रीय आयोजन का नेतृत्व किया और 9,700 करोड़ रुपये की जनजातीय विकास परियोजनाओं की घोषणा की। 15 दिवसीय जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़े में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ और सामुदायिक आयोजन शामिल रहे।
RPSC परीक्षाओं के लिए बिरसा मुंडा के बारे में ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण है?
बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास और जनजातीय मामलों में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं, इसलिए वे RPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले विषय हैं। परीक्षाओं में प्रायः उनकी जन्म-मृत्यु तिथियाँ (1875–1900), उलगुलान विद्रोह (1899–1900), उपाधि 'धरती आबा', जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर) और सरकारी जनजातीय कल्याण योजनाओं पर प्रश्न आते हैं।
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