मुख्य तथ्य

  • अनुसूचित जाति/जनजाति के संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 15(4) — अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपबंध; अनुच्छेद 16(4)
  • अनुसूचित जाति/जनजाति जनसंख्या (जनगणना 2011): अनुसूचित जाति = 16.6% (20.14 करोड़); अनुसूचित जनजाति = 8.6% (10.43 करोड़);
  • अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 — विशेष न्यायालय, त्वरित परीक्षण; NCRB 2022: अनुसूचित जाति पर 51,656 अत्याचार (उत्तर प्रदेश
  • महिलाओं के संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के लिए विशेष उपबंध बनाने की अनुमति देता है;
  • PESA अधिनियम, 1996 — 5वीं अनुसूची क्षेत्रों (जनजातीय) में पंचायती राज; भूमि अधिग्रहण, लघु वन उत्पाद, जल निकायों पर ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य;

मुख्य बिंदु

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    अनुसूचित जाति/जनजाति के संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 15(4) — अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपबंध; अनुच्छेद 16(4) — सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण; अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन; अनुच्छेद 46 — अनुसूचित जाति/जनजाति के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा।

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    अनुसूचित जाति/जनजाति जनसंख्या (जनगणना 2011): अनुसूचित जाति = 16.6% (20.14 करोड़); अनुसूचित जनजाति = 8.6% (10.43 करोड़); दोनों वर्गों में बहुआयामी गरीबी राष्ट्रीय औसत 11.28% से कहीं अधिक।

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    अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 — विशेष न्यायालय, त्वरित परीक्षण; NCRB 2022: अनुसूचित जाति पर 51,656 अत्याचार (उत्तर प्रदेश — 14,922 सर्वाधिक), अनुसूचित जनजाति पर 9,735; 2015 संशोधन में नए अपराध जोड़े।

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    महिलाओं के संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के लिए विशेष उपबंध बनाने की अनुमति देता है; अनुच्छेद 39(क) पर्याप्त आजीविका का समान अधिकार बताता है; अनुच्छेद 39(घ) समान कार्य के लिए समान वेतन पर बल देता है; अनुच्छेद 51क(ङ) महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल प्रथाओं का त्याग मूल कर्तव्य बनाता है; 73वें और 74वें संशोधन पंचायतों और नगरीय स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण देते हैं, जो राजस्थान सहित अनेक राज्यों में 50% है।

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    PESA अधिनियम, 1996 — 5वीं अनुसूची क्षेत्रों (जनजातीय) में पंचायती राज; भूमि अधिग्रहण, लघु वन उत्पाद, जल निकायों पर ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य; राजस्थान के बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ आदि जिले शामिल।

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    वन अधिकार अधिनियम, 2006 — वनवासी अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक अधिकार; 13 दिसंबर 2005 से पूर्व खेती की भूमि पर पट्टे; राष्ट्रीय स्तर पर 23 लाख से अधिक पट्टे वितरित (2023)।

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    महिला-विशिष्ट कानून: घरेलू हिंसा अधिनियम 2005; POSH 2013 (कार्यस्थल यौन उत्पीड़न निषेध); मातृत्व लाभ (संशोधन) 2017 — 12 से 26 सप्ताह अवकाश; समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976; बाल विवाह निषेध 2006

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    गरासिया जनजाति (राजस्थान): प्रमुख जनजाति (~2.75 लाख, मुख्यतः सिरोही, उदयपुर, राजसमंद); नकेली/वरुण माता वन देवी; परीक्षण विवाह (*मोह*); अर्ध-खानाबदोश; PESA, FRA से आच्छादित।

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    प्रधानमंत्री जन धन योजना: 52 करोड़ खाते (2014 से); शून्य-शेष; ₹2 लाख दुर्घटना बीमा + ₹30,000 जीवन बीमा; महिला खाताधारक 56%, ग्रामीण/अर्ध-शहरी 67%।

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    एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS): 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी वाले क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति बच्चों के लिए; 740 EMRS स्वीकृत (2023); प्रत्येक में 480 छात्र (कक्षा VI–XII)।

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    मैला ढोना: मैला ढोने वाले कर्मकारों के नियोजन का प्रतिषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013; 58,098 मैला ढोने वाले (2023 सर्वेक्षण); NAMASTE योजना (2022) — यंत्रीकरण द्वारा 2024 तक उन्मूलन।

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    नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023: 128वाँ संविधान संशोधन; लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए; अगले परिसीमन के बाद लागू (2026 जनगणना पश्चात); वर्तमान में लोकसभा में ~15% महिला सांसद।

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कमजोर वर्गों के कल्याण में संविधान राज्य से क्या अपेक्षा करता है?

कमजोर वर्गों के कल्याण में संविधान राज्य से अपेक्षा करता है कि वह केवल समानता की घोषणा न करे, बल्कि जाति, लिंग, जनजातीय अलगाव, दिव्यांगता, वृद्धावस्था और आर्थिक बहिष्कार से पैदा वास्तविक असमानताओं को विशेष उपायों से घटाए। जनजातीय कार्य मंत्रालय की जनगणना 2011-आधारित तालिका के अनुसार राजस्थान में अनुसूचित जनजाति आबादी 92.39 लाख थी, यानी राज्य की कुल आबादी का 13.5%; इसलिए राजस्थान के उत्तर में जनजातीय कल्याण को अलग से जगह देना जरूरी है।

भारतीय संविधान मूल रूप से सामाजिक क्रांति के प्रति प्रतिबद्ध था — जाति पदानुक्रम, लैंगिक भेदभाव और आर्थिक बहिष्कार का उन्मूलन। अनुच्छेद 14–18 समानता का अधिकार देते हैं; अनुच्छेद 19–22 स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं; अनुच्छेद 23–24 शोषण के विरुद्ध अधिकार देते हैं; और नीति निर्देशक तत्व, यानी भाग 4, राज्य को सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा में सक्रिय नीति बनाने का निर्देश देते हैं। कमजोर वर्गों के मामले में संविधान का तरीका दोहरा है: एक तरफ भेदभाव रोकना, दूसरी तरफ ऐतिहासिक अन्याय से प्रभावित समूहों को विशेष संरक्षण देना।

पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का रुझान साफ़ है: विषय 45, यानी कमजोर वर्ग, राजस्थान लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा में सर्वाधिक परीक्षित समाजशास्त्रीय विषयों में आता है। इसमें प्रतिवर्ष औसतन लगभग 6 अंक मिलते रहे हैं; जनजातीय कल्याण और महिला अधिकार सबसे सामान्य उप-प्रश्न हैं। 2026 परीक्षा में कम-से-कम एक 5 अंकीय प्रश्न जनजातीय समस्याओं, गरासिया जनजाति, महिला कल्याण योजनाओं, आरक्षण या संवैधानिक सुरक्षा पर आ सकता है।

मुख्य बात यह है कि उत्तर केवल योजना-सूची न बने। पहले संवैधानिक आधार बताइए, फिर समूह की वास्तविक समस्या, फिर कानून या योजना, और अंत में कार्यान्वयन की सीमा। उदाहरण के लिए अनुसूचित जाति पर उत्तर में अनुच्छेद 17 और अत्याचार निवारण अधिनियम आएगा; अनुसूचित जनजाति पर उत्तर में पाँचवीं अनुसूची, पेसा और वन अधिकार अधिनियम आएँगे; महिलाओं पर उत्तर में अनुच्छेद 15(3), 39(क), 39(घ), 73वाँ/74वाँ संशोधन और नारी शक्ति वंदन अधिनियम आएँगे।

प्रमुख समूह:

1. महिलाएँ — भारत की जनसंख्या का लगभग 48.4%; महत्वपूर्ण संवैधानिक, विधायी और योजना-आधारित संरक्षण

2. अनुसूचित जातियाँ या दलित — जनसंख्या का 16.6%; अनुच्छेद 17, आरक्षण और अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षित

3. अनुसूचित जनजातियाँ — 8.6%; पाँचवीं/छठी अनुसूची, पेसा, वन अधिकार अधिनियम और जनजातीय उप-योजना से जुड़ी सुरक्षा

4. अन्य पिछड़े वर्ग — मंडल आयोग ने 1980 में 52% अनुमान के आधार पर 27% आरक्षण की सिफारिश की

5. दिव्यांगजन — 2.21% यानी 2.68 करोड़, जनगणना 2011; दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत अधिकार-आधारित संरक्षण

6. वृद्धजन — 2021 के अनुमान में लगभग 10.4%; माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़ा संरक्षण

परीक्षा में इन समूहों को अलग-अलग याद करने से अधिक जरूरी है कि इनके बीच साझा धागा पहचाना जाए: समानता का अधिकार, गरिमा, प्रतिनिधित्व, संसाधनों तक पहुँच, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और न्याय तक पहुँच। यही कमजोर वर्गों के कल्याण का संवैधानिक दायित्व है।

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संभावित प्रश्न

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15Mभारत में जनजातीय समुदायों की पाँच प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?5 अंक · 50 शब्द

मॉडल उत्तर

जनजातीय समुदायों की 5 प्रमुख समस्याएँ: (1) भूमि हरण — पूर्वजों की ज़मीन छिनना (PESA/FRA के बावजूद); (2) शैक्षिक पिछड़ापन — ST साक्षरता 59% (राष्ट्रीय 73%); (3) वन अधिकार अस्वीकृति — 40% दावे अस्वीकृत; (4) विस्थापन — बाँध, खदान, राष्ट्रीय उद्यानों से; (5) स्वास्थ्य वंचना — कुपोषण (~42% स्टंटिंग), उच्च शिशु मृत्यु दर।

~50 शब्द · 5 अंक