13 मार्च 2026 को प्रमुखता से रिपोर्ट किए गए भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के विस्तृत विश्लेषण से एक बढ़ता विरोधाभास सामने आता है: 2019 और 2024 दोनों लोकसभा चुनावों में महिला मतदाता भागीदारी पुरुषों के लगभग बराबर हो गई है, लेकिन संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यंत कम है। 2024 में लोकसभा में महिलाओं की 74 सीटें थीं — कुल का लगभग 13.6% — जो 2019 के ऐतिहासिक उच्च 78 सीटों से थोड़ा कम है।

भारत निर्वाचन आयोग के डेटा से पता चलता है कि 2024 में 50% महिलाओं ने परिवार के सदस्यों के मार्गदर्शन के बिना स्वतंत्र रूप से मतदान किया, जो राजनीतिक स्वायत्तता में वृद्धि को दर्शाता है। महिला आरक्षण अधिनियम (संविधान 106वां संशोधन अधिनियम, 2023) लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देता है, लेकिन परिसीमन और जनगणना प्रक्रियाओं के बाद ही।

राजस्थान में 2023 विधानसभा चुनाव में महिलाएं कुल मतदाताओं का 49.2% थीं। हालांकि 16वीं राजस्थान विधानसभा में केवल 20 महिलाएँ निर्वाचित हुईं (10%)। पंचायती राज संस्थाओं में — जहां राजस्थान ने 50% आरक्षण अनिवार्य किया है — महिला सशक्तिकरण जमीनी स्तर पर सार्थक राजनीतिक भागीदारी का आधार बना हुआ है।