16 अप्रैल 2026 को संघ सरकार ने विस्तारित बजट सत्र की तीन दिवसीय विशेष बैठक के पहले दिन लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन करना तथा लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करना था, जिसमें राज्यों से अधिकतम 815 सीटें और संघ राज्य क्षेत्रों से अधिकतम 35 सीटें होंगी। इस संशोधन का मकसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है, के क्रियान्वयन को 2027 के बाद होने वाली जनगणना पर आधारित परिसीमन से अलग करना और 2011 की जनगणना के आधार पर इसे तत्काल लागू करना था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए इस क्षण को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए निर्णायक बताया तथा सदस्यों को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और राज्यों के बीच मौजूदा सीट अनुपात सुरक्षित रखा जाएगा। सहवर्ती परिसीमन विधेयक, 2026 तथा संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 भी साथ ही पेश किए गए। 131वां संशोधन विधेयक अनुच्छेद 368 के अंतर्गत उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की अपेक्षा करता था और 17 अप्रैल 2026 को मतदान के लिए रखे जाने पर अपेक्षित बहुमत हासिल करने में विफल रहा तथा अस्वीकृत हो गया। इसके बाद सरकार ने संबद्ध विधेयक वापस ले लिए।