संघ सरकार (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका)
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद बनाता है; अनुच्छेद 54 और 55 निर्वाचक मंडल तथा मतमूल्य विधि बताते हैं।
- अनुच्छेद 60, 61, 72 और 123 शपथ, महाभियोग, क्षमा तथा अध्यादेश शक्तियों को अलग रखते हैं।
- अनुच्छेद 74, 75, 75(3) और 78 संघ की कार्यपालिका को संसदीय बनाते हैं, राष्ट्रपति-प्रधान नहीं।
- अनुच्छेद 80 राज्यसभा की संरचना तय करता है; अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना तय करता है।
- अनुच्छेद 93 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से जुड़ा है; अनुच्छेद 110 धन विधेयक को राजकोषीय विषयों तक सीमित रखता है।
मुख्य बिंदु
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अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद बनाता है; अनुच्छेद 54 और 55 निर्वाचक मंडल तथा मतमूल्य विधि बताते हैं।
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अनुच्छेद 60, 61, 72 और 123 शपथ, महाभियोग, क्षमा तथा अध्यादेश शक्तियों को अलग रखते हैं।
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अनुच्छेद 74, 75, 75(3) और 78 संघ की कार्यपालिका को संसदीय बनाते हैं, राष्ट्रपति-प्रधान नहीं।
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अनुच्छेद 80 राज्यसभा की संरचना तय करता है; अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना तय करता है।
- 5
अनुच्छेद 93 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से जुड़ा है; अनुच्छेद 110 धन विधेयक को राजकोषीय विषयों तक सीमित रखता है।
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अनुच्छेद 117 वित्त विधेयक को धन विधेयक से अलग करता है; हर व्यय-संबंधी विधेयक धन विधेयक नहीं है।
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अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना करता है; अनुच्छेद 137, 141 और 143 क्रमशः पुनर्विलोकन, पूर्ववर्ती निर्णयों की बाध्यता तथा परामर्शी अधिकारिता से जुड़े हैं।
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न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े मामलों की यह कड़ी 1981, 1993, 1998 और 2015 तक फैली है, जिसमें 2015 के निर्णय ने न्यायिक प्रधानता को बनाए रखा।
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राष्ट्रपति का निर्वाचन कैसे होता है और मतमूल्य क्यों महत्त्व रखता है?
भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन संसद और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों वाले संघीय निर्वाचक मंडल से होता है, इसलिए मतमूल्य संसद और राज्यों के बीच संतुलन बनाता है।
भारत निर्वाचन आयोग की 2022 राष्ट्रपति निर्वाचन मतमूल्य तालिका के अनुसार राजस्थान में 200 निर्वाचित विधानसभा सीटें और 1971 की जनगणना के आधार पर 2,57,65,806 की जनसंख्या थी; प्रत्येक विधायक का मतमूल्य 129 और कुल मतमूल्य 25,800 था।
संवैधानिक स्थिति
- अनुच्छेद 52 — भारत का राष्ट्रपति संघ कार्यपालिका की पहली कड़ी है: भारत में एक राष्ट्रपति होगा।
- संविधान में यह पद केवल प्रतीकात्मक नहीं है।
- अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करता है, पर आगे के अनुच्छेद इसका प्रयोग संसदीय मंत्रिमंडल की सलाह से कराते हैं।
अनुच्छेद 54 के अंतर्गत निर्वाचक मंडल
| इकाई | राष्ट्रपति निर्वाचन में भूमिका |
|---|---|
| संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य | भाग लेते हैं |
| राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य | भाग लेते हैं |
| दिल्ली और पुडुचेरी | संवैधानिक स्पष्टीकरण अनुच्छेद 54 तथा 55 के लिए राज्य इकाई की तरह मानता है |
| नामित सदस्य | इस निर्वाचन में मत नहीं देते |
| राजस्थान के निर्वाचित विधायक | राष्ट्रपति निर्वाचन में महत्त्व रखते हैं |
| संसद के नामित सदस्य | राष्ट्रपति निर्वाचन में मत नहीं देते |
अनुच्छेद 55: निर्वाचन रीति और मतमूल्य
- अनुच्छेद 55 निर्वाचन की रीति एवं मतमूल्य समानता का सूत्र देता है।
- विधायक का मतमूल्य राज्य की जनसंख्या और निर्वाचित विधायकों की संख्या से जुड़ता है।
- सांसद का मतमूल्य इस तरह समायोजित होता है कि संसद और राज्य संतुलित रहें।
- अनुच्छेद में दी गई जनसंख्या की परिभाषा बाद के जनगणना-संबंधी प्रावधानों से प्रभावित है, इसलिए सूत्र और जनसंख्या आधार साथ-साथ पढ़े जाते हैं।
- यही कारण है कि राजस्थान के विधायक का मतमूल्य किसी छोटे राज्य के विधायक जैसा नहीं होता।
- निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत और गुप्त मतदान के ज़रिए होता है।
संघीय जनादेश
- केवल संसदीय बहुमत के बल पर इस पद पर कब्ज़ा नहीं हो पाता, क्योंकि राज्य विधानसभाएँ भी इसका आवश्यक भाग हैं।
- राष्ट्रपति का जनादेश प्रत्यक्ष लोकप्रिय नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष, भारित और संघीय है।
- आम भ्रम उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से होता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और नामित सदस्य मतदान करते हैं, लेकिन राज्यों के विधायक नहीं।
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1MCQविशेष संघीय निर्वाचक मंडल द्वारा संघ प्रमुख को चुनने में कौन सदस्य भाग लेते हैं?
व्याख्या
अनुच्छेद 54 संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों और निर्वाचित विधानसभा सदस्यों को लेता है, तथा संवैधानिक स्पष्टीकरण से दिल्ली और पुडुचेरी शामिल होते हैं। नामित सदस्य बाहर हैं, और मुख्यमंत्री को अलग मत नहीं मिलता जब तक वे निर्वाचित विधायक न हों।
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