भारत सरकार ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त (आरजीआई) कार्यालय के जरिए 13 अप्रैल 2026 के आसपास अनेक राज्यों में जनगणना 2027 के प्रथम चरण—गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना—का मैदानी काम प्रारंभ कर दिया है। यह 2011 के बाद भारत की पहली दशकीय जनगणना है; वर्ष 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी और अन्य व्यवस्थागत कारणों से बार-बार स्थगित होती रही, इसलिए यह सोलह वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित होने वाली पहली जनगणना बन गई है। जनगणना दो चरणों में हो रही है—अधिकांश राज्यों में अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना चरण, इसके बाद जनसंख्या गणना चरण, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है (जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026)। वर्ष 1931 के बाद पहली बार, जनगणना 2027 में केवल अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के बजाय सभी जातियों के जातिगत आँकड़े जुटाए जाएंगे, जो केंद्रीय मंत्रिमंडल के वर्ष 2025 के जातियों की गणना के निर्णय के अनुरूप है। यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1948 तथा जनगणना नियमावली 1990 के अंतर्गत लगभग तीस लाख गणनाकारों द्वारा की जा रही है। तकनीक का उपयोग इसमें बड़ा बदलाव है: गणनाकार डिजिटल आँकड़ा संग्रहण के लिए जनगणना मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे तथा स्व-गणना पोर्टल नागरिकों को गणना ब्लॉकों से जुड़े विशिष्ट संदर्भ कोड के साथ ऑनलाइन अपना विवरण भरने की सुविधा देगा। चरण-1 में घर की स्थिति एवं सामग्री, स्वामित्व स्थिति, पेयजल, शौचालय, विद्युत, एलपीजी, इंटरनेट की पहुँच, वाहन, स्मार्टफोन, टेलीविज़न एवं कंप्यूटर जैसी परिसंपत्तियों से जुड़े आँकड़े जुटाए जाएंगे। चरण-2 में जनसांख्यिकीय विवरण—आयु, लिंग, धर्म, भाषा, जाति, साक्षरता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास, प्रजनन एवं दिव्यांगता—संग्रहित किए जाएंगे। अपेक्षा है कि जनगणना अगले दशक के लिए अनुच्छेद 82 के अंतर्गत परिसीमन, कल्याणकारी योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण, आरक्षण नीति बहस एवं विकास नियोजन को नया रूप देगी।
जनगणना 2027 का गृह सूचीकरण चरण प्रारंभ; सोलह वर्षों में पहली जनगणना जातिगत आँकड़े भी जुटाएगी तथा डिजिटल स्व-गणना का उपयोग करेगी
13 अप्रैल 2026 के आसपास भारत ने जनगणना 2027 का गृह सूचीकरण चरण शुरू कर दिया। यह सोलह वर्षों में देश की पहली, हर दस साल में होने वाली जनगणना है। जनसंख्या गणना 1 मार्च 2027 की संदर्भ तिथि के आधार पर आगे होगी। वर्ष 1931 के पश्चात पहली बार सभी जातिगत आँकड़े संग्रहित होंगे। जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत डिजिटल स्व-गणना का उपयोग किया जाएगा तथा इसके आँकड़े परिसीमन, कल्याण और आरक्षण से जुड़े निर्णयों को प्रभावित करेंगे।
मुख्य तथ्य
- जनगणना 2027 का गृह सूचीकरण चरण 13 अप्रैल 2026 के आसपास प्रारंभ होगा
- सोलह वर्षों में पहली दशकीय जनगणना
- दो चरण: गृह सूचीकरण (अप्रैल-सितंबर 2026) तथा जनसंख्या गणना (संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027)
- वर्ष 1931 के पश्चात पहली बार सभी जातियों के लिए जातिगत आँकड़े संग्रहित होंगे
- जनगणना अधिनियम 1948 तथा जनगणना नियमावली 1990 के अंतर्गत संचालित
- जनगणना मोबाइल ऐप तथा स्व-गणना पोर्टल का उपयोग
- लगभग तीस लाख गणनाकार
- अनुच्छेद 82 के अंतर्गत परिसीमन तथा आरक्षण नीति पर बहस तेज होगी।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: अप्रैल 2026 में शुरू हुई जनगणना 2027 के मकान सूचीकरण चरण के महत्व पर चर्चा कीजिए, जिसमें जाति गणना, डिजिटल स्व-गणना तथा अनुच्छेद 82 के अंतर्गत परिसीमन के निहितार्थ शामिल हैं।
उत्तर (50 शब्द):
भारत ने 13 अप्रैल 2026 के आसपास जनगणना 2027 का मकान सूचीकरण चरण शुरू किया — 2011 के बाद पहली दशकीय जनगणना, 16 वर्षों का अंतराल। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत 30 लाख गणनाकार जनगणना मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल का उपयोग करेंगे। 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों की गणना होगी।
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जनगणना 2027 की प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस कानून के तहत कराई जाती है?
भारत की दशकीय जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत होती है, जो जनगणना कराने के लिए बनाया गया केंद्रीय कानून है। इसका विस्तृत कामकाजी ढाँचा — जिसमें गणनाकारों के कर्तव्य, गोपनीयता, दंड और अनुसूचियाँ शामिल हैं — जनगणना नियमावली 1990 में दिया गया है। गृह मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक पद, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त (आरजीआई), जनगणना के नियोजन और संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं। सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम 2008 दूसरे सांख्यिकीय सर्वेक्षणों पर लागू होता है और डिजिटल व्यक्तिगत आँकड़ा संरक्षण अधिनियम 2023 एक सामान्य आँकड़ा संरक्षण कानून है, जनगणना का आधार नहीं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की जनगणना किस विधि के अंतर्गत आयोजित होती है?
जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत होती है। यह अधिनियम केंद्र सरकार को जनगणना कराने की मंशा अधिसूचित करने और उसके संचालन के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है। विस्तृत परिचालन ढाँचा जनगणना नियमावली 1990 में दिया गया है, और इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त (आरजीआई) कार्यालय करता है।
यह 1931 के पश्चात पूर्ण जातिगत आँकड़े जुटाने वाली पहली जनगणना क्यों है?
भारत ने प्रत्येक जनगणना में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की गणना की है, किंतु 1931 के पश्चात अन्य जातियों की गणना नहीं की। वर्ष 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल्याण, आरक्षण तथा सामाजिक न्याय पर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में मदद के लिए 2027 की जनगणना में सभी नागरिकों की जातियों की गणना का निर्णय लिया।
जनगणना 2027 का उपयोग किसमें होगा?
जनगणना के आँकड़ों का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान, आरक्षण से जुड़ी बहसों, वित्त आयोग द्वारा राजकोषीय हस्तांतरण, संविधान के अनुच्छेद 82 के अंतर्गत लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए विकास नियोजन से जुड़ी नीतियों में होगा।
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