गृह मंत्रालय ने असम के बोडो समुदाय के पारंपरिक बाथौ धर्म के लिए अलग जनगणना कोड बनाने की मंज़ूरी दी है। अगली जनगणना में बाथौ आस्था को अलग से दर्ज किया जाएगा। इसका मुख्य महत्व यह है कि बोडो लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान अब जनगणना में अलग रूप से दिखेगी, बजाय इसके कि वह किसी सामान्य श्रेणी में दब जाए। बोडो समुदाय असम का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, इसलिए यह निर्णय केवल धार्मिक पहचान का मामला नहीं है; यह शासन, जनगणना वर्गीकरण और जनजातीय कल्याण से भी जुड़ता है।
परीक्षा में गृह मंत्रालय की मंज़ूरी को केंद्र सरकार की भूमिका, जनगणना में पहचान दर्ज करने की प्रशासनिक प्रक्रिया और विविधता की आधिकारिक मान्यता के उदाहरण के रूप में पढ़ें। प्रीलिम्स में प्रश्न सीधे पूछा जा सकता है कि अलग जनगणना कोड किस धर्म और किस समुदाय से जुड़ा है। मुख्य परीक्षा में इससे पहचान-आधारित शासन, जनजातीय समुदायों की मान्यता, अल्पसंख्यक पहचान और लक्षित कल्याण योजनाओं की बेहतर योजना जैसे पहलुओं पर छोटा उत्तर बन सकता है।
पूर्वोत्तर भारत और असम के जनजातीय समुदाय पढ़ते समय बाथौ धर्म को बोडो समुदाय की पारंपरिक आस्था के रूप में याद रखें। बाथौ धर्म को अलग दर्ज करने से बोडो समुदाय की संख्या, धार्मिक पहचान और नीति-निर्माण से जुड़े आंकड़ों को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी। इसलिए यह अपडेट केवल एक कोड की मंज़ूरी नहीं, बल्कि भारत की बहु-सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक आंकड़ों में सही जगह देने से जुड़ा निर्णय है।
