बेंगलुरु स्थित नैनो और सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र (CeNS) के शोधकर्ताओं ने जिंक-आयन बैटरी (ZIB) के प्रदर्शन में सुधार के लिए एक थर्मो-इलेक्ट्रोकेमिकल सक्रियण प्रक्रिया विकसित की। यह तकनीक V2O5 (वैनेडियम ऑक्साइड) की संरचना को Zn-V2O5 में बदलती है।

इस सक्रिय सामग्री से अधिक ऊर्जा घनत्व मिलता है और इसे बिना क्षरण के हजारों बार रिचार्ज किया जा सकता है। जलीय जिंक-आयन बैटरी लिथियम-आयन प्रणालियों का सुरक्षित, गैर-ज्वलनशील, पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, जिसमें प्रचुर और कम लागत वाले जिंक का उपयोग होता है। इससे आयातित लिथियम और कोबाल्ट पर भारत की निर्भरता कम होती है। इस शोध को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का समर्थन मिला था।