प्रकाशित: 21 नवंबर 2025समाचार स्रोतटॉपिक
बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने CeNS में जिंक-आयन बैटरी के कैथोड में सफलता हासिल की
बेंगलुरु स्थित नैनो और सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र (CeNS) के शोधकर्ताओं ने जिंक-आयन बैटरी (ZIB) के प्रदर्शन में सुधार के लिए एक थर्मो-इलेक्ट्रोकेमिकल सक्रियण प्रक्रिया विकसित की। यह तकनीक V2O5 (वैनेडियम ऑक्साइड) की संरचना को Zn-V2O5 में बदलती है।
इस सक्रिय सामग्री से अधिक ऊर्जा घनत्व मिलता है और इसे बिना क्षरण के हजारों बार रिचार्ज किया जा सकता है। जलीय जिंक-आयन बैटरी लिथियम-आयन प्रणालियों का सुरक्षित, गैर-ज्वलनशील, पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, जिसमें प्रचुर और कम लागत वाले जिंक का उपयोग होता है। इससे आयातित लिथियम और कोबाल्ट पर भारत की निर्भरता कम होती है। इस शोध को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का समर्थन मिला था।
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प्रश्न: सीएनएस बेंगलुरु की जिंक-आयन बैटरी सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर (50 शब्द):
सीएनएस बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने थर्मो-इलेक्ट्रोकेमिकल सक्रियण प्रक्रिया विकसित की, जो वैनेडियम ऑक्साइड को जलीय जिंक-आयन बैटरियों के लिए छिद्रयुक्त जिंक-वैनेडियम ऑक्साइड कैथोड में बदलती है। डीएसटी-समर्थित यह नवाचार उच्च ऊर्जा घनत्व और हजारों चक्र देता है; आयातित लिथियम-कोबाल्ट की जगह प्रचुर, सस्ते जिंक का उपयोग करता है। यह ज्वलनशील नहीं, पर्यावरण-अनुकूल है और ग्रिड भंडारण रोडमैप को मजबूत करता है।
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