प्रकाशित: 20 मार्च 2026बिज़नेस स्टैंडर्डविज्ञान-प्रौद्योगिकी
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट 2026: क्षेत्र 195.3 अरब डॉलर तक पहुँचा, 2025 में 18% वृद्धि
Aसीधा उत्तर
जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस पर जारी इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 के अनुसार, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में 18% की अब तक की सबसे तेज़ वार्षिक वृद्धि के साथ 195.3 अरब डॉलर पर पहुँच गई। 2014 में यह 10 अरब डॉलर थी; अब राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 5% है और 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
मुख्य तथ्य
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 के अनुसार, 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 18% की अब तक की सबसे तेज़ वार्षिक वृद्धि के साथ 195.3 अरब डॉलर पर पहुँच गई।
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस पर जारी की गई।
2014 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था केवल 10 अरब डॉलर थी; 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और अब राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 5% है।
जैव-औषधि, जैव-कृषि, जैव-औद्योगिक क्षेत्र और जैव-सूचना प्रौद्योगिकी इस वृद्धि को गति दे रहे हैं।
भारत दुनिया के 12 प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी केंद्रों में शामिल है और यहाँ 11,800 से अधिक बायोटेक स्टार्ट-अप हैं।
राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति 2021–25 और अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति (2024) इसके प्रमुख नीतिगत आधार हैं।
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 नई दिल्ली में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस पर 19–20 मार्च 2026 के आसपास जारी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 18% बढ़कर 195.3 अरब डॉलर हो गई। यह अब तक की सबसे तेज़ वार्षिक वृद्धि दर है और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में क्षेत्र का योगदान लगभग 5% है। यह क्षेत्र 2014 के केवल 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195.3 अरब डॉलर हो गया, यानी एक दशक से कुछ अधिक समय में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई।
90.2 अरब डॉलर के साथ जैव-औद्योगिक खंड सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा; इसके बाद जैव-औषधि और जैव-कृषि के खंड रहे। दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20% है और वह दुनिया के 60% से अधिक टीकों की आपूर्ति करता है। जैव प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यम संघ (ABLE) ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी और देश जैव प्रौद्योगिकी का वैश्विक केंद्र बनेगा। सरकार की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति तथा BIRAC के ज़रिए अनुसंधान एवं विकास के लिए बढ़े वित्त-पोषण को इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में गिना गया है। राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशक अपनाने वाले किसानों के लिए बढ़ते जैव-कृषि खंड में अच्छी संभावनाएँ हैं।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के 195.3 अरब डॉलर तक पहुँचने के पीछे के कारणों का विश्लेषण कीजिए। यह भी बताइए कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति जैव-उर्वरकों और जैव-कीटनाशकों से राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों की खेती को कैसे सहारा दे सकती है।
उत्तर:
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में 18% बढ़कर 195.3 अरब डॉलर हो गई, जबकि 2014 में यह 10 अरब डॉलर थी। अब राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 5% है। BioE3 नीति और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) से अनुसंधान एवं विकास के लिए बढ़ा वित्त-पोषण इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं और 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँचने में सहायक हो सकते हैं। राजस्थान में बढ़ता जैव-कृषि क्षेत्र शुष्क क्षेत्रों के किसानों को जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशक अपनाने में मदद कर सकता है।
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इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत की बायोइकोनॉमी 2025 में $195.3 अरब तक पहुंची और 18% की वृद्धि दर्ज की, जो अब तक की सर्वाधिक वार्षिक दर थी।
2. बायोइंडस्ट्रियल खंड $90.2 अरब के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता था।
3. IBER 2026 भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा तैयार की गई।
4. भारत की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य 2033 तक $300 अरब तक पहुंचना है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
व्याख्या · सही उत्तर A
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। भारत की बायोइकोनॉमी 2025 में 18% वृद्धि के साथ $195.3 अरब तक पहुंची, बायोइंडस्ट्रियल खंड $90.2 अरब के साथ अग्रणी रहा, और 2033 तक $300 अरब का लक्ष्य रखा गया है। कथन 3 गलत है: IBER 2026 विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा नहीं, बल्कि एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (ABLE) — एक निजी उद्योग निकाय — द्वारा विकसित की गई। BIRAC (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक गैर-लाभकारी PSE है।
2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था कितनी थी और किस दर से बढ़ी?
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 के अनुसार, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में 195.3 अरब डॉलर तक पहुँची और 18% की अब तक की सबसे तेज़ वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) क्या है और भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है?
जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का एक उपक्रम है। यह बायोटेक स्टार्ट-अप और अनुसंधान को वित्तीय सहायता और सहयोग देता है। इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट (IBER) 2026 इसके 14वें स्थापना दिवस पर जारी की गई।
2030 के लिए भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का अनुमान क्या है और 2014 में यह कितनी थी?
2014 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 10 अरब डॉलर थी। 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 5% है। यह दो दशक से कम समय में 30 गुना बढ़ोतरी है।
अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति (2024) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति (2024) भारत में उच्च-प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली प्रमुख नीति है। राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति 2021–25 के साथ यह भारत की जैव-अर्थव्यवस्था की वृद्धि का एक प्रमुख आधार है।
जैव प्रौद्योगिकी में भारत दुनिया में किस स्थान पर है और यहाँ कितने बायोटेक स्टार्ट-अप हैं?
भारत दुनिया के 12 प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी केंद्रों में शामिल है और यहाँ 11,800 से अधिक बायोटेक स्टार्ट-अप हैं। इस कारण यह दुनिया के सबसे जीवंत बायोटेक पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है।
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