भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला अनुप्रयुक्त सूक्ष्मतरंग इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी एवं अनुसंधान सोसायटी अर्थात सेमीयर और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अधीन केंद्र इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क अर्थात इस्ट्रैक ने 13 मई 2026 को मुंबई स्थित IIT बंबई परिसर के भीतर सेमीयर मुख्यालय में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर इस्ट्रैक इसरो के निदेशक डॉ ए के अनिल कुमार और सेमीयर के महानिदेशक डॉ पी हनुमंत राव ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थाएँ स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड अर्धचालक मॉड्यूलों पर आधारित अत्याधुनिक उच्च शक्ति प्रवर्धक प्रणालियाँ मिलकर डिज़ाइन और विकसित करेंगी, जिनका उपयोग बेंगलुरु के निकट ब्यालालू स्थित भारतीय गहन अंतरिक्ष नेटवर्क के भू-केंद्रों में किया जाएगा। ये उच्च शक्ति प्रणालियाँ एक्स-बैंड में टेलीकमांड संकेत को गहन अंतरिक्ष यानों तक भेजे जाने से पहले प्रवर्धित करने के लिए अनिवार्य हैं। ऐसे यानों में भविष्य के मंगल एवं शुक्र परिक्रमी तथा नियोजित आदित्य अनुवर्ती हेलियोफिजिक्स मिशन शामिल हैं। यह सहयोग गैटेक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किए जा रहे गैलियम नाइट्राइड पावर मॉड्यूलों का उपयोग करता है। इसका उद्देश्य विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता घटाना, मिशन लागत कम करना और स्वदेशी क्षमता में भारत को नासा गहन अंतरिक्ष नेटवर्क तथा ईएसए ईएस्ट्रैक के समकक्ष लाना है। यह समझौता ज्ञापन संयुक्त मानव शक्ति प्रशिक्षण, भारतीय उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भर गहन अंतरिक्ष भू-खंड के लिए दीर्घकालिक रोडमैप के द्वार भी खोलता है।