सूर्यास्त्र 26 जनवरी 2026 को 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार प्रदर्शित हुआ। यह भारत का पहला स्वदेशी, सार्वभौमिक, बहु-कैलिबर, लंबी दूरी का रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे सतह-से-सतह पर प्रहार के लिए बताया गया है। समसामयिकी में यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ता है। परीक्षा की दृष्टि से इसकी मुख्य बात नाम या परेड तक सीमित नहीं है; यह भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता और भारतीय सेना की मारक क्षमता से भी जुड़ा संकेतक है।
बहु-कैलिबर का सीधा मतलब है कि यह अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट दागने में सक्षम प्रणाली है — परीक्षा के लिए बस इतना समझना काफी है। लंबी दूरी और सतह-से-सतह भूमिका इसे रक्षा तकनीक के सामान्य प्रश्नों में प्रासंगिक बनाती है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा और UPSC प्रीलिम्स में ऐसे तथ्य अक्सर मिलान, कथन-आधारित प्रश्न या नई रक्षा प्रणालियों की पहचान के रूप में पूछे जा सकते हैं। इसलिए तैयारी में इसके नाम, भूमिका, पदार्पण और स्वदेशी विनिर्माण संकेत को अलग-अलग याद रखना उपयोगी रहेगा। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग भारत में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, आयात-निर्भरता घटाने की नीति-दिशा और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसे व्यापक बिंदुओं के उदाहरण के रूप में किया जा सकता है।
स्टैटिक जीके से इसका लिंक रक्षा प्रणालियों के वर्गीकरण, सतह-से-सतह हथियारों और गणतंत्र दिवस परेड में दिखाए जाने वाले सैन्य प्लेटफ़ॉर्म से बनता है। सूर्यास्त्र का पदार्पण इसलिए भी परीक्षा-उपयोगी है क्योंकि इसमें एक साथ तीन संकेत मिलते हैं: स्वदेशी निर्माण, सेना की मारक क्षमता और बहु-कैलिबर लंबी दूरी का रॉकेट लॉन्चर सिस्टम।
