पूर्वी सिक्किम में भारत-चीन सीमा के पास स्थित पंगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य में 20 जनवरी 2026 से जंगल में भीषण आग लगी हुई है। इससे लगभग 12 हेक्टेयर घना अल्पाइन और शीतोष्ण वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। 1,800 से 5,500 मीटर की ऊँचाई पर 128 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य पूर्वी हिमालय में जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ लाल पांडा, हिमालयी काला भालू और कस्तूरी मृग जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के अलावा ब्लड फीजेंट और सैटायर ट्रैगोपैन जैसे कई स्थानिक पक्षी पाए जाते हैं।

सिक्किम वन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए वन रक्षकों और स्थानीय समुदाय के स्वयंसेवकों सहित कई अग्निशमन दल तैनात किए हैं। लेकिन दुर्गम इलाका, अधिक ऊँचाई, तेज़ हवाएँ और सड़कों की कमी आग बुझाने में मुश्किल पैदा कर रही हैं। आग के आबादी वाले इलाकों की ओर फैलने की स्थिति में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को तैनाती के लिए तैयार रखा गया है।

संरक्षण विशेषज्ञों ने अभयारण्य के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र पर आग के असर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनकी खास चिंता जंगल की निचली परत में उगने वाले बाँस को लेकर है, जिस पर लाल पांडा की आबादी निर्भर रहती है। आशंका है कि असामान्य रूप से शुष्क सर्दी में सूखी पत्तियों के सुलगने से आग लगी। सिक्किम में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई। राज्य सरकार ने आग लगने के कारण की जाँच के आदेश दिए हैं और इससे प्रभावित होने वाले स्थानीय समुदायों के लिए मुआवज़े की घोषणा की है।