केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 23 नवंबर 2025 को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 381 रहा और 'बहुत खराब' श्रेणी में था। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पर सर्दियों की खतरनाक धुंध लगातार छाई रही। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 थे, जिन्हें वाहन उत्सर्जन, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने, औद्योगिक गतिविधियों तथा प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों—हवा की धीमी गति और तापमान व्युत्क्रमण—ने बढ़ाया। दिल्ली में 2025 के दौरान AQI एक दिन भी 'अच्छा' नहीं रहा; इस मापदंड पर यह हाल के वर्षों का सबसे खराब वर्ष था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के चरण III और IV के प्रतिबंध लागू थे। इनमें निर्माण कार्यों, भारी वाहनों के प्रवेश और डीज़ल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक शामिल थी। भारत के केंद्रीय बजट 2025 में 131 गैर-प्राप्ति शहरों के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत ₹10,000 करोड़ आवंटित किए गए थे। राजस्थान के प्रमुख शहरी केंद्र—जोधपुर (सीमेंट की धूल), जयपुर (वाहनों और निर्माण कार्यों से होने वाला प्रदूषण) तथा कोटा (औद्योगिक प्रदूषण)—भी NCAP के तहत गैर-प्राप्ति शहरों में शामिल हैं और उनके लिए 2026 तक प्रदूषण घटाने के कड़े लक्ष्य तय किए गए हैं।