प्रकाशित: 10 अक्टूबर 2025पर्यावरण
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन प्रमुख भारतीय बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत तीन प्रमुख बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दी: दीनदयाल पोर्ट (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट (तमिलनाडु) और पारादीप पोर्ट (ओडिशा)। ये बंदरगाह हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपभोग और निर्यात के एकीकृत केंद्र होंगे।
वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट ने ₹25 करोड़ की पायलट परियोजना शुरू की। दीनदयाल पोर्ट ने ₹13 करोड़ की स्वदेशी मेगावाट-स्तरीय सुविधा (140 मीट्रिक टन वार्षिक) शुरू की। ग्रीन हाइड्रोजन हब का उद्देश्य इस्पात, सीमेंट और शिपिंग जैसे उन क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करना है, जहाँ उत्सर्जन घटाना कठिन है।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
पूर्वोत्तर राज्यों में लघु जलविद्युत परियोजनाओं को प्रति मेगावाट कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
व्याख्या · सही उत्तर ANE राज्य और सीमावर्ती जिलों को ₹3.6 करोड़ प्रति MW या लागत का 30% (अधिकतम ₹30 करोड़); अन्य राज्यों को ₹2.4 करोड़ प्रति MW।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वी.ओ. चिदम्बरनार बंदरगाह ने हरित हाइड्रोजन के लिए कौन सी पायलट परियोजना शुरू की?
**वी.ओ. चिदम्बरनार पोर्ट अथॉरिटी (तमिलनाडु) ने सड़क प्रकाश और EV चार्जिंग जैसे हरित हाइड्रोजन अनुप्रयोगों के लिए 10 Nm3/घंटा क्षमता के साथ 25 करोड़ रुपये की पायलट परियोजना शुरू की।** यह भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत हरित हाइड्रोजन हब नामित तीन बंदरगाहों में से एक है।
देनदयाल बंदरगाह ने हरित हाइड्रोजन के लिए कौन सी सुविधा शुरू की?
**दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (गुजरात) ने 140 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली 13 करोड़ रुपये की मेगावाट-स्केल स्वदेशी सुविधा** हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए शुरू की। यह भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन हरित हाइड्रोजन हबों में से एक है।
हरित हाइड्रोजन हब कौन से कठिन क्षेत्रों को लक्षित करेंगे?
**हरित हाइड्रोजन हब इस्पात, सीमेंट और शिपिंग जैसे कठिन क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य रखते हैं।** इन क्षेत्रों को सीधे विद्युतीकृत करना मुश्किल है, जिससे हाइड्रोजन — जो प्रत्यक्ष उत्सर्जन के बिना जीवाश्म ईंधन की जगह ले सकता है — औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान बन जाता है।
भारत के तीन हरित हाइड्रोजन हब कहाँ स्थित हैं?
भारत के तीन हरित हाइड्रोजन हब हैं: **गुजरात में देनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, तमिलनाडु में वी.ओ. चिदम्बरनार पोर्ट अथॉरिटी और ओडिशा में पारादीप पोर्ट अथॉरिटी।** इन्हें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत मान्यता दी गई।
हरित हाइड्रोजन क्या है और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
**हरित हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा** (सौर/पवन) का उपयोग करके पानी को विभाजित करके बनाई जाती है, जिसमें शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है। यह भारत के लिए इस्पात और शिपिंग जैसे कठिन क्षेत्रों के लिए स्वच्छ ईंधन के रूप में और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन तथा 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।