13 नवंबर 2025 को भारतीय वायु सेना (IAF) ने पूर्वी लद्दाख में लगभग 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित मुध-न्योमा वायु सेना स्टेशन का औपचारिक रूप से संचालन शुरू किया। इससे यह दुनिया के सबसे ऊँचे लड़ाकू विमान-संचालन योग्य एयरबेसों में से एक बन गया। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने नए उन्नत रनवे पर C-130J परिवहन विमान उतारकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित किया। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 'प्रोजेक्ट हिमांक' के तहत ₹230 करोड़ की लागत से यह बेस बनाया है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से मात्र 23–35 किमी दूर है। उन्नत सुविधाओं में 2.7 किमी लंबा पक्का रनवे, मजबूत विमान आश्रय, हथियार डिपो, नया ATC कॉम्प्लेक्स, रडार प्रणाली और आवास शामिल हैं। इसके संचालन से लेह और थोइसे जैसे दूरस्थ ठिकानों पर निर्भरता कम होगी और लड़ाकू जेट व भारी विमानों की त्वरित तैनाती संभव होगी। 2020 के गलवान घाटी गतिरोध के बाद सीमा अवसंरचना विकास में तेजी आई, और यह बेस उसी दिशा में एक प्रमुख उपलब्धि है। IAF ने इसके साथ उच्च-ऊँचाई वाले पर्वतीय युद्धाभ्यास 'एक्सरसाइज पूर्वी प्रचंड' भी आयोजित किया।