राजस्थान के बीकानेर में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की नींव रखी। यह 2,500 मेगावाट-घंटा क्षमता की परियोजना है और इसे 1,560 मेगावाट-पीक सौर संयंत्र से जोड़ा गया है। परियोजना अवाडा ग्रुप विकसित कर रहा है और संयुक्त निवेश ₹9,200 करोड़ से अधिक बताया गया है। 2,500 मेगावाट-घंटा भंडारण और 1,560 मेगावाट-पीक सौर क्षमता का संयोजन नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति को संभालने का ठोस उदाहरण देता है। इससे राज्य-विशेष करेंट अफ़ेयर्स को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के ऊर्जा-अध्याय से जोड़कर पढ़ने का आधार मिलता है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का महत्व इसलिए है कि सौर या पवन जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनी अतिरिक्त बिजली को संग्रहित किया जा सकता है और कम उत्पादन के समय जारी किया जा सकता है। इससे चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति को सहारा मिलता है और ऊर्जा स्रोतों की अनियमितता की समस्या घटती है। बीकानेर में ऐसी परियोजना राज्य की ऊर्जा अवसंरचना और हरित विकास रणनीति के लिए परीक्षा-उपयोगी उदाहरण बनती है। इसे राजस्थान के भूगोल, ऊर्जा संसाधन और सतत विकास वाले उत्तरों में उदाहरण के रूप में रखा जा सकता है।
आर्थिक और पर्यावरणीय पक्ष भी महत्वपूर्ण हैं। संयुक्त परियोजनाओं से 1,600 से अधिक हरित रोजगार बनने, हर साल 20 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटने और प्रति वर्ष 600 लाख लीटर पानी बचने की बात कही गई है। प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, क्षमता, निवेश, डेवलपर और पर्यावरणीय लाभ पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, हरित रोजगार और राजस्थान की क्षेत्रीय विकास क्षमता से जोड़ा जा सकता है।
