राजस्थान सरकार ने 19 मई 2026 को औपचारिक रूप से निर्णय लिया कि केंद्रीय प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना और राज्य द्वारा अनुमोदित ई-मोबिलिटी योजना के संयोजन के तहत अगस्त 2026 तक आठ प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें लगाई जाएंगी। यह निर्णय इसी माह की शुरुआत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ईंधन संरक्षण अपील के बाद आया, जो पेट्रोलियम मांग कम करने के प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय आह्वान के बाद की गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने काफिले का आकार कम किया और नई परिवहन नीति का उदाहरण पेश करने के लिए इलेक्ट्रिक बस से यात्रा की। 500 ई-बसें जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर और अलवर में तैनात की जाएंगी। ये पुराने डीज़ल बेड़े की जगह लेंगी और गर्मियों में टियर-2 राजस्थान शहरों में बढ़ते शहरी वायु प्रदूषण को कम करेंगी। इन बसों का संचालन राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के सकल लागत अनुबंध मॉडल के तहत चयनित रियायतग्राहियों के साथ साझेदारी में किया जाएगा। इस मॉडल में केंद्र प्रति-किलोमीटर सब्सिडी देता है और राज्य डिपो बुनियादी ढांचा तथा बिजली टैरिफ सहायता प्रदान करता है। यह निर्णय पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस के समानांतर निवेश से भी जुड़ता है, जिसे कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के घीलोठ औद्योगिक क्षेत्र में आरआईआईसीओ द्वारा 2,65,329 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई है। यहां लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से राजस्थान का पहला ई-बस विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जाना है, जिससे राज्य ई-मोबिलिटी केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
राजस्थान सरकार ने 19 मई 2026 को निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना और राज्य की अनुमोदित ई-मोबिलिटी योजना के तहत अगस्त 2026 तक आठ शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा; यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हाल की राष्ट्रीय संसाधन अपील के बाद ईंधन संरक्षण के आह्वान के अनुरूप है
राजस्थान ने 19 मई 2026 को निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा और राज्य की ई-मोबिलिटी योजना के तहत अगस्त 2026 तक जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर और अलवर सहित आठ शहरों में 500 ई-बसें चलाई जाएंगी। यह कदम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ईंधन संरक्षण की अपील से भी जुड़ा है। पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस घीलोठ में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से राज्य का पहला ई-बस संयंत्र स्थापित करेगी।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान सरकार ने 19 मई 2026 को अगस्त 2026 तक सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 ई-बसें चलाने का निर्णय लिया
- ये बसें जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर और अलवर सहित आठ शहरों में चलाई जाएंगी
- केंद्रीय प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना और राज्य द्वारा अनुमोदित ई-मोबिलिटी योजना, दोनों को मिलाकर लागू किया जाएगा
- यह निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ईंधन संरक्षण को लेकर पहले की अपील और प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संसाधन संबंधी आह्वान के अनुरूप है
- राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम सकल लागत अनुबंध मॉडल के तहत निजी रियायतग्राहियों के ज़रिए बसें चलाएगा।
- पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के घीलोठ में RIICO की 2,65,329 वर्ग मीटर भूमि पर राजस्थान के पहले ई-बस विनिर्माण संयंत्र में लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
6-अक्ष वर्गीकरण
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19 मई 2026 के राजस्थान ई-बस निर्णय पर निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजस्थान सरकार अगस्त 2026 तक आठ प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करने की योजना बना रही है। 2. राजस्थान का पहला ई-बस विनिर्माण संयंत्र पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के घीलोठ में स्थापित कर रही है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: राज्य सरकार ने 19 मई 2026 को अगस्त 2026 तक जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर और अलवर में सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करने का निर्णय लिया। कथन 2 सही है: पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस को कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के घीलोठ में आरआईआईसीओ के ज़रिए 2,65,329 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई है ताकि लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से राजस्थान का पहला ई-बस विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जा सके। दोनों कथन सही हैं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान सरकार ने 19 मई 2026 को सार्वजनिक परिवहन के संबंध में क्या निर्णय लिया?
राज्य ने केंद्रीय प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना और राज्य ई-मोबिलिटी योजना के तहत अगस्त 2026 तक आठ प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया।
कौन से आठ शहरों को नई ई-बसें मिलेंगी?
जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर और अलवर को शहर के भीतर सार्वजनिक परिवहन के लिए 500 ई-बसें मिलेंगी।
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत इस्तेमाल होने वाला सकल लागत अनुबंध मॉडल क्या है?
सकल लागत अनुबंध में निजी ऑपरेटर बसें चलाता है और राज्य परिवहन निगम उसे प्रति किलोमीटर तय दर से भुगतान करता है। केंद्र पूंजीगत और परिचालन लागत पर सब्सिडी देता है, जबकि राज्य डिपो का बुनियादी ढांचा और बिजली टैरिफ में सहायता उपलब्ध कराता है।
राजस्थान में पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस की भूमिका क्या है?
पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस को कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले के घीलोठ में आरआईआईसीओ से 2,65,329 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई है, ताकि लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से राजस्थान का पहला ई-बस विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जा सके।
यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन संरक्षण की अपील से कैसे जुड़ता है?
यह निर्णय पेट्रोलियम की मांग कम करने के प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय आह्वान के जवाब में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पहले दिए ईंधन संरक्षण निर्देश को लागू करता है। इसके तहत शहरी सार्वजनिक परिवहन को डीज़ल बसों से बिजली-चालित बेड़े की ओर ले जाया जा रहा है।
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