केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 मई 2026 को बीकानेर के पास भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्र से वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम चरण-2 (वीवीपी-2) की शुरुआत की। यह पाकिस्तान से लगती राजस्थान की पश्चिमी सीमा के गांवों के समग्र विकास की एक महत्वपूर्ण पहल है। वीवीपी-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 सामरिक गांवों को बुनियादी ढांचे और सामुदायिक विकास कार्यों के लिए चुना गया है। जिलावार चयन में श्रीगंगानगर के 68 गांव, बीकानेर के 46, बाड़मेर के 36, जैसलमेर के 30 और फलोदी (हाल ही में जोधपुर से अलग किया गया) के 4 गांव शामिल हैं। यह कार्यक्रम इन दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क, 4जी मोबाइल नेटवर्क, बिजली की पहुंच और टेलीविजन सुविधा पर केंद्रित है। इसका सामरिक उद्देश्य सीमावर्ती गांवों से पलायन कम करना, "अंतिम गांव के बजाय पहला गांव" दृष्टिकोण को लागू करना और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भावनात्मक जुड़ाव तथा सुरक्षा की मजबूत परत तैयार करना है। इस कार्यक्रम में प्रति गांव 3 करोड़ रुपये का वार्षिक आवंटन दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, पशुपालन, खेल, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में 137 करोड़ रुपये के 1,000 से अधिक विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। सरकार सामाजिक जुड़ाव और भावनात्मक संबंध मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों, पर्यटन गतिविधियों, प्रशिक्षण सत्रों और सामुदायिक बैठकों के जरिए सामुदायिक भागीदारी तथा विश्वास-निर्माण उपायों पर भी ध्यान दे रही है। वीवीपी-2, 2023 में चीन के साथ उत्तरी हिमालयी सीमा के लिए शुरू किए गए मूल वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम का अगला चरण है, जिसे अब पश्चिमी भारत-पाकिस्तान सीमा तक बढ़ाया गया है।