दिसंबर 2025 में आयोजित 9वें राष्ट्रीय बिजली सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कड़ी चेतावनी दी कि बिजली गिरना भारत की सबसे घातक, लेकिन सबसे कम आंकी गई प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। 2019 से 2025 के बीच इसमें लगभग 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वार्षिक वृद्धि दर 7–14 प्रतिशत अनुमानित है, जिसका सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से जुड़े वायुमंडलीय तापमान में बढ़ोतरी से है। भारत में बिजली गिरने से प्रतिवर्ष चक्रवात, बाढ़ या भूकंप से अधिक मौतें होती हैं। सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार और राजस्थान शामिल हैं। राजस्थान के ग्रामीण जिलों में मानसून सत्र (जून–सितंबर) के दौरान थार मरुस्थल और अरावली तलहटी में तीव्र संवहनी गतिविधि के कारण बिजली से होने वाली मौतें अक्सर होती हैं। विशेषज्ञों ने मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली, दूरदर्शन और सामुदायिक रेडियो पर बिजली अलर्ट को शामिल करने और उच्च जोखिम वाले ग्रामीण क्षेत्रों में लाइटनिंग अरेस्टर लगाने की मांग की। जलवायु वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तापमान वृद्धि की मौजूदा प्रवृत्ति जारी रही तो 2050 तक भारत में बिजली की घटनाओं में 25–30 प्रतिशत और वृद्धि हो सकती है।