मार्च 2026 के पहले सप्ताह में उत्तर भारत और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में लू की स्थिति असामान्य रूप से जल्दी बन गई। यह खबर परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य मौसमी बदलाव, पश्चिमी विक्षोभ, तापमान-विचलन, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे विषय प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा दोनों में पूछे जा सकते हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्र में तापमान सामान्य से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज हुआ। मार्च में पहाड़ी इलाकों में इतनी तेज गर्मी दुर्लभ मानी जाती है, क्योंकि इस समय सामान्यतः सर्दी से गर्मी की ओर क्रमिक बदलाव दिखता है।
भारतीय मौसम विभाग ने पश्चिम राजस्थान, सौराष्ट्र-कच्छ और उत्तर गुजरात क्षेत्र सहित कई इलाकों के लिए अलर्ट जारी किए। ऐसी स्थिति में शुरुआती चेतावनी, रबी फसलों की सुरक्षा, बार-बार सिंचाई की जरूरत और स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव जैसे मुद्दे अहम हो जाते हैं। स्टैटिक जीके से इसका सीधा लिंक भारत की जलवायु, पश्चिमी विक्षोभ, हीट-एक्शन प्लान और चरम मौसम घटनाओं से है। पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों में उत्तर-पश्चिम भारत को बारिश और ठंडक देने वाली प्रमुख मौसमी प्रणाली है; इनके पर्याप्त न रहने और सूखी सर्दी के बाद जमीन जल्दी गर्म होती है, जिससे तापमान बढ़ सकता है।
प्रीलिम्स में सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं, जैसे घटना का समय, तापमान-विचलन, प्रभावित क्षेत्र और चेतावनी जारी करने वाली संस्था। मुख्य परीक्षा में इसे जलवायु जोखिम, गर्मी के तनाव, कृषि, जल संसाधनों और आपदा-पूर्व तैयारी के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। इस घटना का मूल संदेश यह है कि गर्मी अब केवल अप्रैल-मई की समस्या नहीं रह गई; मार्च की शुरुआत में भी तापमान-विचलन प्रशासन और समाज दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
