प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 26 मई 2026 को सार्थक-पीडीएस समग्र योजना (पीडीएस में स्वचालन के साथ राशन परिवहन और हैंडलिंग-आय में सहायता योजना) को मंजूरी दी। अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक पांच वर्षों के लिए इसका केंद्रीय परिव्यय 25,530 करोड़ रुपये है। यह योजना दो मौजूदा पहलों को एक साथ लाती है—"एनएफएसए के तहत राज्य के भीतर खाद्यान्न की आवाजाही और एफपीएस विक्रेताओं के मार्जिन के लिए राज्य एजेंसियों को सहायता" तथा "सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी से आधुनिकीकरण और सुधार योजना (स्मार्ट पीडीएस)"। सार्थक-पीडीएस का लक्ष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों की मदद से पीडीएस को आधुनिक बनाना और उसका कामकाज अधिक कुशल करना है। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत देश भर के लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने की सरकार की कानूनी और सामाजिक प्रतिबद्धता पूरी करने में मदद करेगी। इसकी प्रमुख विशेषताओं में खरीद से लेकर लाभार्थी तक पूरी आपूर्ति शृंखला को डिजिटल बनाना; उचित मूल्य की दुकानों पर बायोमेट्रिक और आधार-आधारित प्रमाणीकरण; ई-पीओएस उपकरणों से भंडार की तत्काल निगरानी; वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) से जुड़ाव; और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से धोखाधड़ी की पहचान शामिल हैं। यह योजना एफपीएस विक्रेताओं की कमीशन व्यवस्था को भी मजबूत करती है, तौल मशीनों के स्वचालन में मदद करती है और शिकायत निवारण की व्यवस्था देती है। सार्थक-पीडीएस 2013 में एनएफएसए लागू होने के बाद भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण की सबसे महत्वपूर्ण कोशिश है। इससे व्यवस्था में होने वाले रिसाव में बड़ी कमी आने और खाद्य सुरक्षा के लाभ बेहतर ढंग से पहुंचने की उम्मीद है।