प्रकाशित: 9 सितंबर 2025अर्थव्यवस्था
दुर्लभ मृदा तत्वों पर चीन का वर्चस्व: भारत वैश्विक उत्पादन का 2% से कम उत्पादन करता है
10 सितंबर 2025 को आई एक रिपोर्ट ने दुर्लभ मृदा तत्वों (REE) के मामले में चीन और भारत के बीच बड़ा अंतर रेखांकित किया। चीन वैश्विक भंडार का 50%, 60% से अधिक उत्पादन और 92% शोधन क्षमता नियंत्रित करता है। भारत के पास महत्वपूर्ण भंडार होने के बावजूद, वह वैश्विक उत्पादन का 2% से कम ही करता है और 75% से अधिक REE चीन से आयात करता है।
वैश्विक REE शोध पत्रों में चीन की हिस्सेदारी 30% है, जबकि भारत की लगभग 6%। REE इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइनों और रक्षा प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट में भारत से राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में खनन व प्रसंस्करण क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की बात कही गई है।
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दिसंबर 2025 में DoT द्वारा जारी NFAP-2025 का पूरा नाम क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर CNFAP का अर्थ है राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना, भारत में रेडियो आवृत्ति स्पेक्ट्रम आवंटन को नियंत्रित करने वाला एक प्रमुख नीतिगत दस्तावेज।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चीन वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के उत्पादन में क्यों प्रभुत्व रखता है?
चीन वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी भंडार और खनन उत्पादन में सबसे बड़ा भागीदार है। परिष्करण में उसका प्रभुत्व और भी अधिक है, क्योंकि शोधन क्षमता का लगभग 92% चीन में है।
वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी तत्व उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी क्या है?
भारत के पास महत्वपूर्ण भंडार होने के बावजूद वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 2% से कम है और वह अपनी 75% से अधिक आवश्यकताएँ आयात से पूरी करता है।
दुर्लभ पृथ्वी तत्व क्या हैं और ये रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
दुर्लभ पृथ्वी तत्व 17 धातुओं का समूह हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा प्रणालियों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन कैसे बढ़ा सकता है?
भारत को घरेलू खनन, प्रसंस्करण तकनीक, मैग्नेट निर्माण और गहरे समुद्र में अन्वेषण में निवेश बढ़ाकर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ना होगा।
भारत के प्रमुख दुर्लभ पृथ्वी तत्व भंडार कहाँ स्थित हैं?
भारत के प्रमुख दुर्लभ पृथ्वी भंडार ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल (मोनाजाइट रेत) और राजस्थान में स्थित हैं।