जल शक्ति मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2026 को नदी बेसिन प्रबंधन (आरबीएम) योजना को 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 2,183 करोड़ रुपये के काफी बढ़े हुए परिव्यय के साथ जारी रखने की घोषणा की। यह 2021-22 से 2025-26 के चरण में आवंटित 1,276 करोड़ रुपये से लगभग 71 प्रतिशत अधिक है। यह योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग से लागू की जाती है। नए चरण में उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी क्षेत्रों के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बेसिनों — ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता एवं सिंधु नदी प्रणालियों — को प्राथमिकता दी गई है तथा जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर एवं नागालैंड जैसे राज्यों को सहायता दी जाएगी। इसके घटकों में नदी बेसिन मास्टर प्लान तैयार करना और अपडेट करना, स्थलाकृतिक एवं जल विज्ञान सर्वेक्षण, एकीकृत बेसिन-स्तरीय जल संसाधन आकलन तथा राज्य एजेंसियों की क्षमता निर्माण शामिल हैं। उन्नत तकनीकी साधनों — भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), उपग्रह दूर संवेदन, लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) तथा ड्रोन-आधारित सर्वेक्षणों — का उपयोग बेसिन से जुड़े डेटा को अधिक सटीक बनाने के लिए किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन बेसिनों में जल तनाव, संसाधनों के असमान वितरण, जलवायु-परिवर्तन के प्रभावों तथा सीमा-पार समन्वय की जरूरतों से निपटना है, जहाँ सतही एवं भूजल व्यवस्थाएँ जटिल हैं। यह योजना ब्रह्मपुत्र बोर्ड एवं इसी प्रकार की नदी-बेसिन संस्थाओं के संचालन की भारत की क्षमता को भी मजबूत करती है तथा शामिल बेसिनों में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई विस्तार एवं जल विद्युत योजना में मदद करती है। आरबीएम योजना का जारी रहना राष्ट्रीय जल नीति एवं उस एकीकृत जल-संसाधन विकास ढाँचे के अनुरूप है जिसे सरकार 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि से अपना रही है।
केंद्र ने नदी बेसिन प्रबंधन योजना को 2026-27 से 2030-31 तक 2,183 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जारी रखा; ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता एवं सिंधु बेसिन पर केंद्रित
जल शक्ति मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2026 को नदी बेसिन प्रबंधन योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी; इसके लिए 2,183 करोड़ रुपये रखे गए हैं — यह 1,276 करोड़ रुपये से 71% की वृद्धि है। मुख्य ध्यान ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता एवं सिंधु बेसिनों पर है; बेसिन मास्टर प्लान के लिए जीआईएस, उपग्रह दूर संवेदन, लिडार और ड्रोन सर्वेक्षण जैसे उपकरण शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- जल शक्ति मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2026 को नदी बेसिन प्रबंधन योजना को 2026-27 से 2030-31 तक 2,183 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जारी रखा
- परिव्यय 2021-22 से 2025-26 चरण में आवंटित 1,276 करोड़ रुपये से लगभग 71 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है
- जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के माध्यम से केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में कार्यान्वयन
- प्राथमिकता बेसिनों में उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी क्षेत्रों की ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता एवं सिंधु नदी प्रणालियाँ शामिल हैं
- जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर एवं नागालैंड को नदी बेसिन मास्टर प्लान के साथ समर्थन
- स्थलाकृतिक एवं जल विज्ञान आँकड़ों के लिए जीआईएस, उपग्रह दूर संवेदन, लिडार एवं ड्रोन-आधारित सर्वेक्षणों का उपयोग
- कवर किए गए बेसिनों में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल विद्युत योजना तथा सीमा-पार समन्वय को मजबूत करता है
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2026-27 से 2030-31 तक 2,183 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जारी नदी बेसिन प्रबंधन (आरबीएम) योजना किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्यान्वित होती है?
नदी बेसिन प्रबंधन योजना जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग से केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में कार्यान्वित होती है। इसे 18 अप्रैल 2026 को 2026-27 से 2030-31 के लिए 2,183 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जारी रखा गया।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026-27 से 2030-31 के लिए नदी बेसिन प्रबंधन योजना के चालू चरण का परिव्यय क्या है?
जल शक्ति मंत्रालय ने नदी बेसिन प्रबंधन योजना के इस चरण के लिए 2,183 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं; यह 2021-22 से 2025-26 के पिछले चरण में आवंटित 1,276 करोड़ रुपये से लगभग 71 प्रतिशत अधिक है।
इस योजना के तहत कौन से नदी बेसिनों को प्राथमिकता दी गई है?
इसमें ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता एवं सिंधु नदी प्रणालियों सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बेसिनों को प्राथमिकता दी गई है, और इसका कार्यान्वयन उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी क्षेत्रों पर केंद्रित है।
योजना से सबसे अधिक प्रत्यक्ष लाभ किन राज्यों को होगा?
जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर एवं नागालैंड जैसे राज्यों को नदी बेसिन मास्टर प्लान और क्षमता निर्माण से सबसे अधिक प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
आरबीएम योजना किन प्रौद्योगिकीय उपकरणों का उपयोग करेगी?
इस योजना में स्थलाकृतिक और जल-विज्ञान संबंधी आँकड़े जुटाने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), उपग्रह दूर-संवेदन, लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षणों का उपयोग किया जाता है।
आरबीएम योजना किस विभाग के अंतर्गत कार्यान्वित होती है?
यह जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के तहत केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में कार्यान्वित होती है।
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