प्रकाशित: 24 मार्च 2026समाचार स्रोतअंतरराष्ट्रीय
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: जीएनएसएस जैमिंग से 1,600 से अधिक जहाज प्रभावित, भारत ने नौवहन सुरक्षा उपाय कड़े किए
25 मार्च 2026 तक होर्मुज जलडमरूमध्य संकट — जो 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त सैन्य हमलों से शुरू हुआ — ने फारस की खाड़ी में समुद्री नौवहन को गंभीर रूप से बाधित कर दिया। 24 घंटों के भीतर 1,600 से अधिक जहाजों ने जीएनएसएस (जीपीएस) व्यवधान अनुभव किया, जिनमें से 1,100 से अधिक जहाजों में नौवहन संबंधी असामान्यताएं थीं। कई जहाज अपने एआईएस ट्रांसपोंडर बंद कर रहे थे, जिससे समुद्री निगरानी में ऐसे क्षेत्र बन रहे थे जहाँ निगरानी नहीं हो पा रही थी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे प्रभावित होती है क्योंकि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल कच्चा तेल और अपनी 54% एलपीजी आपूर्ति आयात करता है। ईरान ने भारत और चीन सहित मित्र माने जाने वाले देशों के जहाजों को सशर्त पारगमन की अनुमति दी है। जवाब में भारत ने अपनी स्वदेशी नैविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) प्रणाली को जीपीएस के बैकअप के रूप में बढ़ावा देने तथा भारतीय जहाजों के लिए नौवहन सुरक्षा उपाय कड़े करने पर बल दिया। नैविक भारतीय उपमहाद्वीप और उससे 1,500 किमी तक नौवहन सेवा के लिए विकसित की गई है।
भारत के अतिरिक्त उपायों में अमेरिका, ब्राजील और रूस से कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण, सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार और अरब सागर में ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना एस्कॉर्ट जारी रखना शामिल है। यह संकट राजस्थान के बाड़मेर और पचपदरा रिफाइनरी के तेल उद्योग के लिए भी सीधे प्रासंगिक है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
भारत हरमुज़ जलडमरूमध्य से अपनी एलपीजी आपूर्ति का कितना प्रतिशत आयात करता है?
व्याख्या · सही उत्तर Cलेख के अनुसार, भारत हरमुज़ जलडमरूमध्य से अपनी एलपीजी आपूर्ति का 54% और प्रतिदिन 26 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नैविक क्या है और भारत ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए इसे क्यों बढ़ावा दिया?
नैविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) इसरो की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जो भारत तथा आसपास के 1,500 किमी क्षेत्र में सेवाएँ देती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जीएनएसएस जैमिंग से 1,600 से अधिक जहाजों का नेविगेशन बाधित होने पर भारत ने इसे जीपीएस के बैकअप के रूप में बढ़ावा देने पर बल दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का कितना हिस्सा गुजरता है और यह संकट भारत को कैसे प्रभावित करता है?
वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। यह संकट भारत के कच्चे तेल आयात को खतरे में डालता है, क्योंकि भारत लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य जीएनएसएस जैमिंग संकट के जोखिम को कम करने के लिए भारत ने क्या कदम बताए?
भारत ने नौवहन सुरक्षा उपाय कड़े करने, जीपीएस के बैकअप के रूप में नैविक को बढ़ावा देने, ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण करने और सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार करने जैसे कदमों पर बल दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य जीएनएसएस जैमिंग संकट कब शुरू हुआ और 25 मार्च 2026 तक इसका क्या प्रभाव था?
जीएनएसएस जैमिंग संकट 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। 25 मार्च 2026 तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 1,600 से अधिक जहाजों का नेविगेशन बाधित हो चुका था।
जीएनएसएस जैमिंग क्या है और समुद्री नेविगेशन में इसका क्या महत्व है?
जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) जैमिंग में उपग्रह नेविगेशन संकेतों में जानबूझकर हस्तक्षेप किया जाता है, जिससे जहाजों की स्थिति की जानकारी गलत हो जाती है। होर्मुज जैसे संकरे और व्यस्त जलमार्गों में जहाज इस पर निर्भर होते हैं, इसलिए यह समुद्री नेविगेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।