ब्लूमबर्ग ने 8 जनवरी 2026 को एक आर्थिक आकलन प्रकाशित किया, जिसमें भारत की जीडीपी वृद्धि की दिशा और 2026 में ध्यान देने योग्य पांच प्रमुख आर्थिक कारकों पर प्रकाश डाला गया। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार भारत की जीडीपी 2025-26 में 7.4% बढ़ने का अनुमान है। इसका मुख्य आधार मजबूत घरेलू मांग है, और वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में 8% वृद्धि दर्ज की गई।
खुदरा मुद्रास्फीति 2024-25 में 4.6% से तेजी से गिरकर अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि में लगभग 1.7% हो गई, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नरमी की काफी गुंजाइश बनी। भारत का वस्तु और सेवा निर्यात FY2026 की पहली तिमाही में 209 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वैश्विक व्यापार की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मजबूती दिखाता है।
ब्लूमबर्ग ने 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जिन पांच कारकों की पहचान की, उनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की दिशा, RBI दर कटौती की गति, जलवायु अस्थिरता के बीच कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन, सरकार की राजकोषीय घाटा प्रबंधन रणनीति और भारत के आयात बिल पर वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव शामिल हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने कहा कि भारत की वृद्धि को मजबूत घरेलू मांग, आयकर और GST युक्तिकरण, नरम कच्चे तेल की कीमतों, सरकारी पूंजीगत व्यय को वर्ष की शुरुआत में अधिक रखने और अनुकूल मौद्रिक स्थितियों से बल मिला है।
हालांकि वृद्धि की संभावनाओं के सामने कुछ जोखिम भी हैं। इनमें भारत के निर्यात क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली संभावित अमेरिकी टैरिफ वृद्धि, ग्रामीण और शहरी सुधार में असमानता, तथा पश्चिम एशिया और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों से बाहरी क्षेत्र की कमजोरियां शामिल हैं। मजबूत कृषि प्रदर्शन ने ग्रामीण आय बढ़ाई है, जबकि कर युक्तिकरण उपायों से शहरी मांग में सुधार हुआ है और उपभोग आधार के विस्तार का संकेत मिलता है।
