भारत का ऐतिहासिक कर सुधार — आयकर अधिनियम, 2025 — आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ। इसने 64 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लिया। नए कानून में 536 धाराएं और 23 से अधिक अध्याय हैं और यह स्वतंत्रता के बाद से भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली का सबसे व्यापक सुधार है।

पृष्ठभूमि

आयकर अधिनियम, 1961 पचास वर्षों में बार-बार हुए संशोधनों के कारण जटिल हो गया था। सरल और आधुनिक कानून की आवश्यकता से आयकर अधिनियम, 2025 बनाया गया, जिसे संसद ने पारित किया और जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ।

प्रमुख संरचनात्मक बदलाव

  • 'कर वर्ष' की नई अवधारणा: अधिनियम में एकल 'कर वर्ष' (अप्रैल–मार्च) की व्यवस्था की गई, जिससे भ्रामक वित्त वर्ष (FY) और निर्धारण वर्ष (AY) की दोहरी प्रणाली समाप्त हो गई।
  • नई कर व्यवस्था डिफ़ॉल्ट: सरलीकृत नई कर व्यवस्था धारा 202 के तहत डिफ़ॉल्ट बनी; करदाताओं को पुरानी व्यवस्था के लिए अलग से विकल्प चुनना होगा।
  • Form 130 ने Form 16 की जगह ली: वेतनभोगियों के लिए प्रणाली से बनने वाले नए Form 130 ने Form 16 का स्थान लिया।

कर स्लैब और छूट

  • धारा 87A के तहत ₹60,000 की छूट से ₹12 लाख तक शून्य कर
  • वेतनभोगियों के लिए ₹75,000 की मानक कटौती के बाद प्रभावी कर-मुक्त सीमा ₹12.75 लाख
  • FY 2026-27 के लिए कर स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं

संशोधित भत्ते

  • HRA छूट विस्तारित: बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद को अब 50% HRA छूट
  • बच्चों की शिक्षा भत्ता ₹100 से बढ़कर ₹3,000 प्रति बच्चा प्रति माह
  • भोजन भत्ता ₹50 से बढ़कर ₹200 प्रति भोजन (कर-मुक्त)।
  • नियोक्ता उपहार छूट ₹5,000 से बढ़कर ₹15,000 वार्षिक

अनुपालन बदलाव

  • ITR-3 और ITR-4 की नियत तिथि बढ़कर 31 अगस्त
  • सभी TDS प्रावधान एकल धारा 393 के अंतर्गत।
  • विदेश यात्रा पर TCS घटकर समान 2%
  • शेयर बायबैक पर अब पूंजीगत लाभ के रूप में कर।
  • मोटर दुर्घटना मुआवजे पर ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त।