राजस्थान उच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 के मध्य में जैसलमेर की गदीसर झील के लिए राज्य सरकार को विस्तृत संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने झील के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण, गाद भराव, प्रदूषण और सिकुड़न की रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया था। गदीसर झील ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है, जिसे महारावल गड्सी सिंह ने लगभग 1367 ईस्वी में जैसलमेर की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनवाया था। यह झील संरक्षित विरासत जल निकाय के रूप में नामित है और घाटों, मंदिरों तथा मध्यकालीन प्रवेश द्वार (तीलों की पोल) के कारण एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पारिस्थितिक दृष्टि से, गदीसर प्रवासी पक्षियों और दुर्लभ जलीय वनस्पतियों का आश्रय है तथा राजस्थान के शुष्क थार मरुस्थल परिदृश्य में एक शहरी आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में काम करती है। प्रमुख खतरे हैं: झील के किनारे अवैध निर्माण और व्यावसायिक अतिक्रमण; नौका संचालन से प्रदूषण; गाद भराव से जल भंडारण क्षमता में कमी; जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन योजना का अभाव; अनुपचारित बहिःस्राव का निर्वहन। न्यायालय का हस्तक्षेप राजस्थान और भारत में शहरी झील संरक्षण के व्यापक संकट को रेखांकित करता है और इसे आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के क्रियान्वयन से जोड़ता है। राजस्थान, एक शुष्क राज्य होने के बावजूद, ऐतिहासिक महत्व के कई जल निकायों — बावड़ियां, तालाब, झीलें — का संरक्षक है, जो शहरीकरण और उपेक्षा से खतरे में हैं।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने जैसलमेर की गदीसर झील के लिए संरक्षण योजना माँगी — विरासत आर्द्रभूमि खतरे में
राजस्थान उच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 के मध्य में जैसलमेर की गदीसर झील के लिए राज्य सरकार से विस्तृत संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया — झील के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण, गाद भराव, प्रदूषण और सिकुड़न की रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए। गदीसर झील ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है — जिसे महारावल गड्सी सिंह ने लगभग 1367 ईस्वी में जैसलमेर की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनवाया था। यह झील संरक्षित विरासत जल निकाय के रूप में नामित है और घाटों, मंदिरों तथा मध्यकालीन प्रवेश द्वार (तीलों की पोल) के साथ एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पारिस्थितिक दृष्टि से, गदीसर झील प्रवासी पक्षियों और दुर्लभ जलीय वनस्पतियों को सहारा देती है तथा राजस्थान के शुष्क थार मरुस्थल परिदृश्य में शहरी आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का काम करती है। प्रमुख खतरे: झील के किनारे अवैध निर्माण और व्यावसायिक अतिक्रमण; नौका संचालन से प्रदूषण; गाद भराव से जल भंडारण क्षमता में कमी; जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन योजना का अभाव; अनुपचारित बहिःस्राव का निर्वहन। न्यायालय का हस्तक्षेप राजस्थान और भारत में शहरी झील संरक्षण के व्यापक संकट को रेखांकित करता है — आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के क्रियान्वयन से जोड़ते हुए। राजस्थान, एक शुष्क राज्य होने के बावजूद, ऐतिहासिक महत्व के कई जल निकायों — बावड़ियां, तालाब, झीलें — का संरक्षक है जो शहरीकरण और उपेक्षा से खतरे में हैं।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान उच्च न्यायालय ने जैसलमेर की गदीसर झील के संरक्षण की योजना माँगी।
- गदीसर झील 14वीं सदी का जलाशय है जिसे महारावल गड्सी सिंह ने लगभग 1367 ई. में बनवाया।
- प्रमुख खतरे अतिक्रमण, गाद भराव, प्रदूषण और सिकुड़ता जलग्रहण क्षेत्र हैं।
- यह झील प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है और थार मरुस्थल में शहरी आर्द्रभूमि है।
- यह घाटों, मंदिरों, मध्यकालीन टीलों और पोल द्वारों वाला संरक्षित विरासत स्थल है।
- मामला राजस्थान में शहरी झील संरक्षण की व्यापक चुनौतियों को रेखांकित करता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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नवंबर 2025 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने जैसलमेर की गडीसर झील के संबंध में राज्य सरकार से जवाब क्यों मांगा?
उच्च न्यायालय ने गडीसर झील के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। याचिका में जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण और विस्तार, अधिसूचित सीमा बनाए रखने और मरुस्थलीय जैसलमेर की इस ऐतिहासिक मीठे पानी की झील को सुरक्षित रखने जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इसलिए यह शासन और संरक्षण से जुड़ा हस्तक्षेप था, न कि औद्योगिक या निजी पर्यटन परियोजना।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान उच्च न्यायालय ने गदीसर झील के संबंध में निर्देश क्यों जारी किए?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने गदीसर झील के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण, गाद भराव, प्रदूषण और सिकुड़न की रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत संरक्षण योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
गदीसर झील का निर्माण किसने और कब किया?
गदीसर झील 14वीं सदी का कृत्रिम जलाशय है, जिसे जैसलमेर के महारावल गड्सी सिंह ने लगभग 1367 ईस्वी में मरुस्थलीय नगर की जल आवश्यकताओं के लिए बनवाया था।
गदीसर झील का पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
गदीसर झील थार मरुस्थल में एक संरक्षित विरासत आर्द्रभूमि है जो प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है तथा ऐतिहासिक घाटों, मंदिरों और मध्यकालीन तीलों की पोल द्वार के कारण पारिस्थितिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
गदीसर झील को कौन से प्रमुख खतरे हैं?
झील में अतिक्रमण, गाद भराव, प्रदूषण और सिकुड़ते जलग्रहण क्षेत्र जैसी समस्याएँ हैं, जो इसकी पारिस्थितिक स्थिति और विरासत महत्व को खतरे में डालती हैं।
गदीसर झील का मामला राजस्थान में किस व्यापक समस्या को उजागर करता है?
यह मामला राजस्थान में शहरी झीलों के संरक्षण की व्यापक चुनौती को रेखांकित करता है, जहाँ कई विरासती जल निकायों पर अतिक्रमण है और वे उपेक्षित हैं।
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