प्रकाशित: 7 मार्च 2026टॉपिक
सरकार 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया विनियमन कानून बनाने की योजना में
केंद्र सरकार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए अलग कानून पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य विचार यह है कि सभी बच्चों पर एक जैसा पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उम्र के आधार पर अलग-अलग स्तर के प्रतिबंध लगाए जाएं। हितधारकों से परामर्श के बाद यह विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। इसलिए यह विषय डिजिटल गवर्नेंस और बाल-सुरक्षा से जुड़ी नीति-बहस के रूप में महत्वपूर्ण है।
परीक्षा की दृष्टि से इसका पहला पहलू शासन और कानून-निर्माण है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म बच्चों की पढ़ाई, संवाद और सूचना-प्राप्ति से जुड़े हैं, लेकिन उनके अत्यधिक इस्तेमाल, सुरक्षा जोखिम और स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता भी बढ़ी है। इसी कारण सरकार पूर्ण रोक के बजाय ऐसी श्रेणीबद्ध व्यवस्था पर विचार कर रही है जिसमें उम्र के हिसाब से प्रतिबंधों की तीव्रता अलग हो सकती है। यह नीति-निर्माण में संतुलन का उदाहरण है, जहां बाल-सुरक्षा, डिजिटल पहुंच और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के नियमन को साथ रखकर निर्णय लेना पड़ता है।
दूसरा पहलू डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 से जुड़ता है। इस अधिनियम में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण से पहले माता-पिता की सत्यापनीय सहमति, बच्चों के हित को नुकसान पहुंचाने वाले डेटा-प्रसंस्करण पर रोक, और बच्चों पर नज़र रखने, व्यवहार आधारित निगरानी तथा टार्गेटेड विज्ञापन पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान हैं। प्रस्तावित सोशल मीडिया कानून बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी व्यापक बहस को आगे बढ़ा सकता है, लेकिन इसका दायरा सोशल मीडिया उपयोग के नियमन पर केंद्रित होगा। RAS और UPSC में यह विषय प्रारंभिक परीक्षा में समसामयिकी, शासन और सोशल मीडिया नियमन के प्रश्नों में, तथा मुख्य परीक्षा में राज्य की नियामक भूमिका, बाल-अधिकार और तकनीक-नीति के विश्लेषण में उपयोगी है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
प्रस्तावित सोशल मीडिया आयु-प्रतिबंध और ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक में सोशल मीडिया खाता बनाने या रखने की न्यूनतम आयु कितने वर्ष तय करने की बात है?
व्याख्या · सही उत्तर Cप्रस्तावित सोशल मीडिया आयु-प्रतिबंध और ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया खाता बनाने, रखने या चलाने से रोकने की बात है। इसमें प्लेटफ़ॉर्मों के लिए आयु-सत्यापन से जुड़े दायित्व भी प्रस्तावित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्र सरकार बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर किस तरह का कानून सोच रही है?
केंद्र सरकार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को विनियमित करने के लिए अलग कानून पर विचार कर रही है। इसमें पूर्ण प्रतिबंध के बजाय उम्र के आधार पर श्रेणीबद्ध प्रतिबंधों का ढांचा अपनाया जा सकता है।
यह विधेयक संसद में कब पेश हो सकता है?
हितधारकों से परामर्श के बाद प्रस्तावित विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
पूर्ण प्रतिबंध के बजाय श्रेणीबद्ध ढांचे का महत्व क्या है?
श्रेणीबद्ध ढांचा सभी बच्चों को एक ही श्रेणी में रखने के बजाय उम्र के हिसाब से अलग-अलग स्तर के प्रतिबंधों की गुंजाइश देता है। इससे बाल-सुरक्षा और डिजिटल पहुंच के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखती है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 से इसका क्या संबंध है?
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 बच्चों के डेटा पर पहले से सुरक्षा देता है, जैसे माता-पिता की सत्यापनीय सहमति, बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले डेटा-प्रसंस्करण पर रोक, और बच्चों पर नज़र रखने या टार्गेटेड विज्ञापन पर रोक।
RAS और UPSC तैयारी में यह विषय क्यों उपयोगी है?
यह विषय प्रारंभिक परीक्षा में समसामयिकी, शासन और सोशल मीडिया नियमन से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा में इसे बाल-अधिकार, राज्य की नियामक भूमिका और तकनीक-नीति के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।