वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों में जल जीवन मिशन (JJM) के बजट में करीब 75% की कटौती की गई है। मूल बजट में आवंटित ₹67,000 करोड़ को घटाकर मात्र ₹17,000 करोड़ कर दिया गया है। यह भारी कटौती जल क्षेत्र के विशेषज्ञों, ग्रामीण विकास अधिकारियों और उन राज्यों के लिए चिंता का विषय है, जो ग्रामीण पेयजल के लिए अंतिम छोर तक कनेक्शन पूरा करने में JJM वित्त पोषण पर निर्भर हैं।

जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 2024 तक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था। समयसीमा बीत जाने के बाद भी भारत भर में लगभग 19% ग्रामीण परिवार अभी भी पाइपलाइन से पेयजल से वंचित हैं। JJM के औपचारिक विस्तार (जिसे अक्सर JJM 2.0 कहा जाता है) के लिए कैबिनेट की मंजूरी अभी भी लंबित है।

राजस्थान भारत के सबसे जल-संकटग्रस्त राज्यों में से एक है, जहां बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और पश्चिमी जिलों के बड़े हिस्से पेयजल के लिए लंबी दूरी की पाइपलाइनों पर निर्भर हैं। 60% की कटौती चल रही परियोजनाओं, स्थापित बुनियादी ढांचे के संचालन एवं रखरखाव (O&M) और शेष बिना जुड़े परिवारों को जोड़ने के लिए जरूरी JJM वित्त पोषण को गंभीर खतरे में डालती है।

नागरिक समाज समूहों ने मांग की है कि कैबिनेट तुरंत JJM 2.0 को मंजूरी दे, ताकि राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के लिए लगातार वित्त पोषण सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कटौती विशेष रूप से बेवक्त है, क्योंकि अब ध्यान नई स्थापना से हटकर स्थिरता पर आ गया है और स्थापित प्रणालियों को O&M वित्त पोषण की आवश्यकता है।