वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों में जल जीवन मिशन (JJM) का बजट करीब 75% घटा दिया गया। मूल बजट में इसके लिए ₹67,000 करोड़ रखे गए थे, जिन्हें घटाकर ₹17,000 करोड़ कर दिया गया। इतनी बड़ी कटौती से जल क्षेत्र के विशेषज्ञों, ग्रामीण विकास अधिकारियों और उन राज्यों में चिंता बढ़ी है, जो हर ग्रामीण घर तक पेयजल कनेक्शन पहुंचाने के लिए JJM से मिलने वाले धन पर निर्भर हैं।
जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) देना था। समयसीमा बीतने के बाद भी देश के लगभग 19% ग्रामीण परिवार पाइप से मिलने वाले पेयजल से वंचित हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को मिशन के औपचारिक विस्तार, जिसे अक्सर JJM 2.0 कहा जाता है, को मंजूरी दी। इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण परिवारों को इस सुविधा से जोड़ना है।
राजस्थान देश के उन राज्यों में है, जहां पानी की कमी सबसे गंभीर है। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर सहित पश्चिमी जिलों के बड़े हिस्से पेयजल के लिए लंबी दूरी की पाइपलाइनों पर निर्भर हैं। चल रहे काम पूरे करने, बने हुए बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव (O&M) तथा बाकी परिवारों को कनेक्शन देने के लिए JJM से मिलने वाला धन ज़रूरी है। वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय आवंटन में करीब 75% की कटौती से इन परियोजनाओं में देरी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कटौती ऐसे समय हुई है, जब ध्यान नई प्रणालियाँ लगाने से हटकर उन्हें लंबे समय तक चालू रखने पर आ गया है। मौजूदा प्रणालियों के नियमित संचालन और रखरखाव के लिए धन चाहिए, जिसकी उपलब्धता अब अनिश्चित है। नागरिक समाज समूहों ने राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लंबित काम पूरे करने के लिए JJM 2.0 को तुरंत मंजूरी देने और धन जारी रखने की मांग की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल अब इस विस्तार को मंजूरी दे चुका है। केंद्र सरकार का कहना है कि कवरेज बढ़ने के बाद खर्च में यह बदलाव उचित है, जबकि आलोचकों का कहना है कि बाकी 19% परिवारों तक पहुंचना ही सबसे कठिन और सबसे महंगा चरण है।
