प्रकाशित: 22 मार्च 2026विज्ञान-प्रौद्योगिकी
केंद्रीय बजट 2026 कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम: जिन क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाना कठिन है, उनके लिए 20,000 करोड़ रुपये का CCUS रोडमैप
केंद्रीय बजट 2026 में घोषित 20,000 करोड़ रुपये का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम CCUS (कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण) रोडमैप पर आधारित है। यह कार्यक्रम बिजली उत्पादन, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रासायनिक उद्योगों जैसे उन क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करने पर केंद्रित है, जहां कटौती करना कठिन है।
यह पहल 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इसके तहत व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट की बाजार-आधारित प्रणाली के ज़रिए उद्योगों को कार्बन कैप्चर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
बजट 2026 में CCUS रोडमैप किस प्रकार के क्षेत्रों पर केंद्रित है?
व्याख्या · सही उत्तर BCCUS बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन जैसे उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहाँ उत्सर्जन घटाना सबसे मुश्किल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्रीय बजट 2026 में घोषित 20,000 करोड़ रुपये का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम क्या है?
**केंद्रीय बजट 2026** में घोषित **20,000 करोड़ रुपये का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम** **CCUS (कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज)** रोडमैप पर आधारित है। इसका उद्देश्य व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट की बाजार-आधारित प्रणाली के माध्यम से **कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्रों** से उत्सर्जन कम करना है।
केंद्रीय बजट 2026 का CCUS कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम किन क्षेत्रों को लक्षित करता है?
**CCUS आधारित कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम** पांच **कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्रों** को लक्षित करता है:
- **बिजली उत्पादन**
- **इस्पात विनिर्माण**
- **सीमेंट उत्पादन**
- **रिफाइनरी**
- **रासायनिक उद्योग**
इन्हें कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्र कहा जाता है क्योंकि इन्हें पारंपरिक तरीकों से डीकार्बनाइज करना कठिन है।
केंद्रीय बजट 2026 की कार्बन क्रेडिट योजना उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कैसे प्रोत्साहित करती है?
**20,000 करोड़ रुपये का CCUS कार्यक्रम** उद्योगों को **व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट की बाजार-आधारित प्रणाली** के माध्यम से प्रोत्साहित करता है। जो उद्योग कार्बन कैप्चर तकनीक अपनाते हैं वे क्रेडिट अर्जित कर उनका व्यापार कर सकते हैं, जो उत्सर्जन कम करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन बनाता है।
भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष क्या है और CCUS कार्यक्रम इसके साथ कैसे संरेखित है?
भारत **2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन** प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय बजट 2026 का **CCUS आधारित कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम** कठिन-से-कम करने वाले क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर को प्रोत्साहित कर सीधे इस लक्ष्य के साथ संरेखित होता है।
CCUS क्या है और केंद्रीय बजट 2026 के कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
**CCUS** का मतलब है **कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज** — एक तकनीक जो वायुमंडल में जाने से पहले स्रोत पर ही CO₂ उत्सर्जन को पकड़ती है। केंद्रीय बजट 2026 में **20,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम** CCUS को अपना रोडमैप बनाता है क्योंकि यह इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन जैसे उद्योगों को संचालन जारी रखते हुए उत्सर्जन में उल्लेखनीय कटौती करने में सक्षम बनाता है, जो भारत के **2070 शुद्ध-शून्य लक्ष्य** का समर्थन करता है।