PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च की नवंबर 2025 मासिक नीति समीक्षा में आगामी शीतकालीन सत्र (1-19 दिसंबर 2025) और शासन क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विधायी तथा न्यायिक घटनाक्रमों को रेखांकित किया गया है।

शीतकालीन सत्र में महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े 10 नए विधेयक लिए जाने की उम्मीद है। प्रमुख प्रस्तावित कानूनों में प्रतिभूति बाजार संहिता (SEBI अधिनियम, SCRA, डिपॉजिटरी अधिनियम को एकीकृत करना); बीमा FDI संशोधन विधेयक (बीमा क्षेत्र में FDI सीमा 74% से 100% तक बढ़ाना); उच्च शिक्षा आयोग विधेयक (UGC की जगह); परमाणु ऊर्जा संशोधन विधेयक (परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी); और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में संशोधन शामिल हैं।

PRS समीक्षा में राष्ट्रपति की सहमति की समयसीमा पर सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी उल्लेख किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि न्यायपालिका राष्ट्रपति या राज्यपाल को राज्य विधेयकों पर सहमति देने के लिए निश्चित समयसीमा तय नहीं कर सकती; इस तरह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत की पुष्टि हुई। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सहमति में अनिश्चित देरी संवैधानिक योजना के विपरीत होगी।

यह फैसला कई राज्यों में राज्यपालों द्वारा राज्य विधानसभाओं से पारित विधेयकों पर सहमति देने में लंबे समय तक देरी की पृष्ठभूमि में आया।