18 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जयपुर में हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी नीतियों और पर्यावरण अभियानों के लिए प्रकृति के प्रति श्रद्धा की भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा लेती है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत संकल्प लेने का आह्वान किया। हरियालो राजस्थान कार्यक्रम व्यापक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और राजस्थान के पारिस्थितिक रूप से नाजुक शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में टिकाऊ भूमि उपयोग पर केंद्रित है। राजस्थान भारत के 10.4% भौगोलिक क्षेत्र में फैला है, लेकिन इसका वन और वृक्ष आवरण केवल 9.6% है (राष्ट्रीय औसत 25.17% के मुकाबले)। राज्य को मरुस्थलीकरण, घटते भूजल और जैव विविधता के नुकसान की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं, पर्यावरणविदों और नागरिक समाज प्रतिनिधियों ने मरुस्थली राज्य के लिए जलवायु अनुकूलन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
राजस्थान हरियालो पर्यावरण कॉन्क्लेव 2025: मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत संकल्प लेने का आह्वान किया, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा ली
18 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जयपुर में हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी नीतियों और पर्यावरण अभियानों के लिए प्रकृति के प्रति श्रद्धा की भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा लेती है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत संकल्प लेने का आह्वान किया। हरियालो राजस्थान कार्यक्रम व्यापक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और राजस्थान के पारिस्थितिक रूप से नाजुक शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में टिकाऊ भूमि उपयोग पर केंद्रित है। राजस्थान भारत के 10.4% भौगोलिक क्षेत्र में फैला है, लेकिन इसका वन और वृक्ष आवरण केवल 9.6% है (राष्ट्रीय औसत 25.17% के मुकाबले)। राज्य को मरुस्थलीकरण, घटते भूजल और जैव विविधता हानि की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं, पर्यावरणविदों और नागरिक समाज प्रतिनिधियों ने मरुस्थली राज्य के लिए जलवायु अनुकूलन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य तथ्य
- मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने 18 दिसंबर 2025 को जयपुर में हरियालो राजस्थान कॉन्क्लेव को संबोधित किया।
- उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में निहित पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत संकल्प लेने का आह्वान किया।
- हरियालो राजस्थान कार्यक्रम व्यापक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग पर केंद्रित है।
- राजस्थान भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.4% है, लेकिन यहाँ वन आवरण केवल 9.6% है; राष्ट्रीय औसत 24.6% है।
- राज्य को मरुस्थलीकरण, घटते भूजल और जैव विविधता हानि की गंभीर चुनौतियों का सामना है।
- कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं और पर्यावरणविदों ने जलवायु अनुकूलन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियालो राजस्थान कार्यक्रम क्या है और यह किस पर केंद्रित है?
हरियालो राजस्थान (अर्थात् 'हरा-भरा राजस्थान') राज्य सरकार का एक पर्यावरण अभियान है जो राजस्थान के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग पर केंद्रित है।
18 दिसंबर 2025 को हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव में CM भजन लाल शर्मा ने क्या रेखांकित किया?
CM भजन लाल शर्मा ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण का व्यक्तिगत संकल्प लेने का आह्वान किया और जोर दिया कि राज्य सरकार अपनी पर्यावरण नीतियों को आकार देने में प्रकृति के प्रति श्रद्धा की भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा लेती है।
राष्ट्रीय औसत की तुलना में राजस्थान का वन आवरण कितना है?
राजस्थान भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 10.4% हिस्से में फैला है लेकिन इसका वन आवरण केवल 9.6% है — जो 24.6% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है और राज्य की गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों को दर्शाता है।
राजस्थान किन प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनसे निपटने पर हरियालो कार्यक्रम केंद्रित है?
राजस्थान के सामने मरुस्थलीकरण, घटते भूजल स्तर और जैव विविधता में कमी जैसी गंभीर चुनौतियाँ हैं — हरियालो राजस्थान कार्यक्रम वृक्षारोपण, जल संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग की पहलों से इनसे निपटने का प्रयास करता है।
हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव में कौन शामिल हुए और इसका उद्देश्य क्या था?
जयपुर में हुए कॉन्क्लेव में नीति-निर्माता, पर्यावरणविद् और विशेषज्ञ एकत्रित हुए। इसमें जलवायु अनुकूलन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया और राजस्थान में पर्यावरणीय कार्रवाई को समन्वित करने का प्रयास हुआ।
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