भारत ने 10 जून 2026 को अमेरिका के साथ कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया, जब अमेरिकी सैन्य बलों ने ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे वाले रासायनिक एवं तेल उत्पाद टैंकर सेटेबेलो पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविक लापता हो गए। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका प्रभाग) नागराज नायडू ने अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को दक्षिण ब्लॉक तलब कर भारत की कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उस समय भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर यात्रा पर थे।

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि एक अमेरिकी विमान ने सटीक निर्देशित गोलाबारी से सेटेबेलो के इंजन कक्ष को निशाना बनाया, क्योंकि जहाज के चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं किया। यह कार्रवाई ईरान के विरुद्ध अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी अभियान के तहत की गई। जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में बंद हो गया।

सेटेबेलो पर कुल 28 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें से 24 भारतीय नागरिक थे। हमले के बाद 21 भारतीय नाविकों को बचा लिया गया जबकि 3 अभी भी लापता हैं। ओमान में भारतीय दूतावास ने बचाव अभियान के समन्वय के लिए ओमानी अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया।

विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा: "हम ओमान तट के पास व्यावसायिक पोत सेटेबेलो पर हमले की निंदा करते हैं।" भारत ने तत्काल तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त नौवहन की बहाली की मांग की। यह घटना भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर डालती है।