प्रधानमंत्री मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान में कुल ₹1,22,100 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह पैकेज माही-बांसवाड़ा परमाणु संयंत्र के आधारशिला समारोह के साथ सामने आया और इसमें ऊर्जा, सिंचाई, जल संसाधन, बिजली पारेषण और सड़क ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल रहीं। परीक्षा की दृष्टि से यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान के विकास मॉडल में ऊर्जा सुरक्षा, कृषि बिजली, जल उपलब्धता और बुनियादी ढांचा एक साथ दिखाई देते हैं।

पैकेज का प्रमुख हिस्सा पीएम-कुसुम के तहत फीडर स्तर पर सोलराइजेशन से जुड़ा है। इन परियोजनाओं की क्षमता 3,517 मेगावाट और लागत ₹16,050 करोड़ बताई गई है। इनका उद्देश्य किसानों को सस्ती सिंचाई बिजली उपलब्ध कराना है। इससे सौर ऊर्जा और सिंचाई बिजली का संबंध स्पष्ट होता है। RAS और UPSC में इसे ऊर्जा संक्रमण, कृषि बुनियादी ढांचा और राज्य-विशेष करेंट अफ़ेयर्स के रूप में पूछा जा सकता है।

बिजली पारेषण के मोर्चे पर ₹13,180 करोड़ की तीन परियोजनाएं शामिल हैं। पारेषण ढांचा इसलिए जरूरी है क्योंकि उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद बिजली को उपभोक्ताओं और कृषि फीडरों तक पहुंचाना भी जरूरी होता है। जल संसाधन भाग में ₹20,830 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें अजमेर जिले का मोर सागर कृत्रिम जलाशय और ईसरदा से जुड़े फीडर शामिल हैं। इससे जल उपलब्धता और क्षेत्रीय जल प्रबंधन का मुद्दा जुड़ता है। अजमेर-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे और अन्य सड़क परियोजनाओं का उल्लेख इस पैकेज को व्यापक बुनियादी ढांचा अपडेट बनाता है। स्टैटिक जीके से इसका लिंक जल संसाधन, सौर ऊर्जा, कृषि बिजली और राज्य के बुनियादी ढांचे से बनता है।