तीसरा अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट 2025 गोवा में 9-12 अक्टूबर 2025 तक आयोजित हुआ। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने किया। गोवा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने सामाजिक न्याय मंत्रालय और भारत में संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से इस फेस्ट की मेजबानी की। आयोजन का मुख्य फोकस दिव्यांग व्यक्तियों के समावेशन, प्रतिभा और सशक्तिकरण को सामने लाना था।
परीक्षा की दृष्टि से यह खबर सामाजिक न्याय, लोक नीति और कौशल विकास से जुड़ी है। ऐसे आयोजन यह दिखाते हैं कि दिव्यांगजन नीतियां केवल कल्याण योजनाओं तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि शिक्षा, प्रशिक्षण, खेल, सार्वजनिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग से भी जुड़ती हैं। इसलिए RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इसे शासन, समावेशी विकास और सामाजिक क्षेत्र की पहलों के उदाहरण के रूप में पढ़ा जा सकता है। प्रारंभिक परीक्षा में तिथि, स्थान, मेजबान और पहल पूछी जा सकती हैं; मुख्य परीक्षा में यह सामाजिक न्याय का उदाहरण बन सकता है।
फेस्ट में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ आईईएलटीएस प्रशिक्षण पुस्तिका लॉन्च की गई। इसके साथ अमेरिकी सांकेतिक भाषा और ब्रिटिश सांकेतिक भाषा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रमुख पहल के रूप में सामने आए। ये पहल कौशल विकास और शिक्षा तक पहुंच के सवाल को सीधे छूती हैं, क्योंकि भाषा और परीक्षा की तैयारी से जुड़ी बाधाएं दिव्यांग अभ्यर्थियों की भागीदारी को प्रभावित कर सकती हैं।
आयोजन में पर्पल थिंक टैंक, प्रदर्शनियां और पैरालंपिक बोच्चिया टूर्नामेंट भी शामिल थे। इससे फेस्ट का दायरा नीति-चर्चा, जागरूकता और खेल-समावेशन तक फैला। स्टैटिक जीके के लिए इसे भारतीय संविधान एवं शासन के तहत लोक नीति और शिकायत निवारण, तथा भारतीय अर्थव्यवस्था के तहत कौशल विकास एवं सामाजिक न्याय से जोड़कर याद रखना उपयोगी रहेगा।
