लैंड स्टैक और राजस्व शब्दावली भारत में डिजिटल भूमि शासन से जुड़ी परीक्षा-उपयोगी पहलें हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी ने 31 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में लैंड स्टैक जीआईएस-आधारित डिजिटल पोर्टल शुरू किया और राजस्व शब्दावली जारी की। यह पायलट डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत चंडीगढ़ और तमिलनाडु में शुरू हुआ।
लैंड स्टैक को भूमि और संपत्ति से जुड़ी जानकारी के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में समझना चाहिए। इसमें यूएलपीआईएन या भू-आधार शामिल है, जो हर भूमि पार्सल के लिए 14-अंकीय विशिष्ट पहचान कोड है। भूमि प्रशासन में अभिलेख, नक्शे और पहचान की स्पष्टता नागरिकों के भरोसे से सीधे जुड़ती है। इसलिए यह पहल पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित भूमि शासन और नागरिकों के जीवन को आसान बनाने से संबंधित है।
राजस्व शब्दावली का महत्व भी इसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। भूमि राजस्व से जुड़े शब्द अलग-अलग प्रशासनिक परंपराओं और राज्यों में अलग ढंग से इस्तेमाल हो सकते हैं। ऐसी शब्दावली राजस्व शब्दों को स्पष्ट और मानकीकृत करने में मदद करती है, जिससे नागरिकों, राजस्व अधिकारियों और नीति-निर्माताओं के लिए भूमि अभिलेख को समझना आसान हो सकता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय प्रीलिम्स में डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, लैंड स्टैक, यूएलपीआईएन, भू-आधार, पायलट क्षेत्र और लॉन्च करने वाले मंत्री जैसे सीधे तथ्यों से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा में इसे ई-गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित सेवा, पारदर्शिता, भूमि प्रशासन सुधार और डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता से जोड़ा जा सकता है। तैयारी में इसे तथ्य और विश्लेषण, दोनों स्तरों पर पढ़ना चाहिए। उत्तर लिखते समय इसे भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और सेवा-प्रदाय सुधार के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
