उच्च न्यायपालिका में सामाजिक विविधता अनिवार्य करने और SC क्षेत्रीय पीठों की स्थापना के लिए राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक 2026 पेश
Aसीधा उत्तर
19 फरवरी को राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने संविधान (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। इसका उद्देश्य उच्च न्यायपालिका में सामाजिक विविधता बढ़ाना और चेन्नई, मुंबई तथा कोलकाता में SC की क्षेत्रीय पीठें स्थापित करना है। आंकड़ों के अनुसार, 78% HC न्यायाधीश उच्च जातियों से हैं, 14% महिलाएं हैं, SC में 90,000+ मामले लंबित हैं और HC में रिक्तियों की दर 33% है।
मुख्य तथ्य
राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने 19 फरवरी 2026 को संविधान (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया।
विधेयक में उच्च न्यायपालिका की नियुक्तियों में सामाजिक विविधता अनिवार्य करने और चेन्नई, मुंबई, कोलकाता में SC की क्षेत्रीय पीठें स्थापित करने का प्रस्ताव है।
आंकड़े: 2018-24 में नियुक्त 78% HC न्यायाधीश उच्च जाति से; केवल 14% महिला न्यायाधीश।
सर्वोच्च न्यायालय में 90,000 से अधिक लंबित मामले; उच्च न्यायालयों में 33% रिक्तता दर।
विधेयक का उद्देश्य HC और SC न्यायाधीशों की नियुक्ति में SC, ST, OBC, अल्पसंख्यकों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
परीक्षा दृष्टि से: न्यायिक विविधता, कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना, अनुच्छेद 124, 217, न्याय तक पहुंच।
19 फरवरी 2026 को राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने एक निजी सदस्य विधेयक के रूप में संविधान (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसमें दो प्रमुख सुधार प्रस्तावित हैं: उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक विविधता को अनिवार्य करना, और नई दिल्ली की प्रमुख पीठ के अतिरिक्त चेन्नई, मुंबई और कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठें स्थापित करना।
यह विधेयक गंभीर आंकड़ों की पृष्ठभूमि में आया: 2018–2024 के बीच नियुक्त 78% उच्च न्यायालय न्यायाधीश उच्च जातियों से हैं; केवल 14% उच्च न्यायालय न्यायाधीश महिलाएं हैं; धार्मिक अल्पसंख्यक उच्च न्यायपालिका में 5% से कम हैं; सर्वोच्च न्यायालय में केवल एक महिला न्यायाधीश हैं। जनवरी 2026 तक सर्वोच्च न्यायालय में 90,000 से अधिक लंबित मामले थे और उच्च न्यायालयों में 33% रिक्तता दर थी। राजस्थान के वादियों को सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के लिए नई दिल्ली जाना पड़ता है; ऐसे में क्षेत्रीय पीठें न्याय तक पहुंच में बड़ा सुधार ला सकती हैं।
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संविधान संशोधन विधेयक प्रत्येक सदन में किस प्रकार के बहुमत से पारित होता है?
व्याख्या · सही उत्तर B
संविधान संशोधन विधेयक के लिए अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है - कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई।
सत्यापित
स्रोत: स्रोत विवरण उपलब्ध नहीं है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्यसभा में पेश संविधान (संशोधन) विधेयक 2026 में क्या प्रस्ताव किया गया है?
राज्यसभा सांसद पी. विल्सन द्वारा 19 फरवरी 2026 को पेश इस विधेयक में उच्च न्यायपालिका की नियुक्तियों में सामाजिक विविधता अनिवार्य करने और चेन्नई, मुंबई तथा कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठें स्थापित करने का प्रस्ताव है।
संविधान संशोधन विधेयक 2026 के समर्थन में न्यायिक विविधता के कौन से आंकड़े प्रस्तुत किए गए?
विधेयक में बताया गया कि 2018–24 के बीच नियुक्त 78% उच्च न्यायालय न्यायाधीश उच्च जाति से थे, केवल 14% महिलाएं थीं, सर्वोच्च न्यायालय में 90,000 से अधिक मामले लंबित थे और उच्च न्यायालयों में 33% रिक्तता थी।
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किन संवैधानिक अनुच्छेदों के अंतर्गत होती है?
अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है, जबकि अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है।
संविधान संशोधन विधेयक 2026 उच्च न्यायपालिका में किन वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहता है?
यह विधेयक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहता है।
सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठें स्थापित करना न्याय तक पहुँच के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
चेन्नई, मुंबई और कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठें स्थापित होने से दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत के वादियों को नई दिल्ली आने की बाध्यता समाप्त होगी और आम नागरिकों के लिए न्याय तक पहुँच सरल होगी।
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