राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दे दी है। इससे CJI सहित कुल स्वीकृत संख्या 38 न्यायाधीश हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करने के लिए उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दी थी, जिससे न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि हुई। यह निर्णय शीर्ष न्यायालय के बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लिया गया। इस विस्तार से उम्मीद है कि मामलों का निपटारा तेज़ी से होगा और सुनवाई में देरी कम होगी। न्यायाधीशों के वेतन, सहायक कर्मचारियों और अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या आखिरी बार 2019 में बढ़ाई गई थी, जब संसद ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 से इस संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 (CJI को छोड़कर) किया था। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 ने मूल रूप से CJI के अलावा 10 न्यायाधीशों की संख्या तय की थी। मुकदमों की बढ़ती संख्या के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए इसमें 1960, 1977, 1986, 2009 और 2019 में क्रमशः संशोधन किए गए। संविधान का अनुच्छेद 124 उच्चतम न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है और संसद को कानून के ज़रिए न्यायाधीशों की संख्या तय करने का अधिकार देता है।