प्रकाशित: 10 अक्टूबर 2025अर्थव्यवस्था
ग्रीन हाइड्रोजन हब: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन भारतीय बंदरगाह नामित
दीनदयाल (कांडला), वी.ओ. चिदम्बरनार (तूतीकोरिन) और पारादीप बंदरगाहों को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन हब नामित किया गया। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के जून 2025 के दिशा-निर्देशों के अनुसार अक्टूबर 2025 में यह मान्यता दी गई।
ये हब हाइड्रोजन उत्पादन और उपभोग के प्रमुख केंद्र होंगे। भारत ने 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 25 GW से अधिक सौर क्षमता वाला राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख अपस्ट्रीम आपूर्तिकर्ता है।
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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक भारत का हरित हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्य क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर Cभारत NGHM के तहत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है। 25 गीगावाट से अधिक सौर क्षमता वाला राजस्थान इस आपूर्ति शृंखला का एक प्रमुख शुरुआती आपूर्तिकर्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत कौन से तीन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब नामित किया गया?
**देनदयाल (कांडला), वी.ओ. चिदम्बरनार (तूतीकोरिन) और पारादीप बंदरगाहों को** नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत **हरित हाइड्रोजन हब नामित किया गया।** दिशानिर्देश जून 2025 में जारी हुए और अक्टूबर 2025 में क्रियान्वित हुए।
2030 तक हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भारत का लक्ष्य क्या है?
**भारत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है।** देनदयाल, वी.ओ. चिदम्बरनार और पारादीप बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में नामित करने का उद्देश्य इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और निर्यात क्षमता के माध्यम से इस लक्ष्य को तेज करना है।
भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन क्या है?
**राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM)** भारत का प्रमुख कार्यक्रम है जो हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित करने और 2030 तक **50 लाख मीट्रिक टन** उत्पादन का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
भारत के हरित हाइड्रोजन उत्पादन में राजस्थान की क्या भूमिका है?
**25 GW से अधिक की विशाल सौर क्षमता के साथ राजस्थान हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख अपस्ट्रीम आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित है।** सौर ऊर्जा का उपयोग इलेक्ट्रोलाइजर चलाने के लिए किया जाता है जो पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करते हैं।
बंदरगाह स्थानों को हरित हाइड्रोजन हब क्यों चुना गया?
**बंदरगाह स्थानों को हरित हाइड्रोजन हब इसलिए चुना गया** क्योंकि बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय बाजारों को हरित हाइड्रोजन के निर्यात, इलेक्ट्रोलाइजर और उपकरणों के आयात, स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन की आवश्यकता वाले औद्योगिक क्लस्टर से जुड़ाव और इस्पात व सीमेंट जैसे कठिन क्षेत्रों के लिए शिपिंग बुनियादी ढाँचे के निकट बड़े पैमाने पर उत्पादन को सुगम बनाते हैं।