दीनदयाल (कांडला), वी.ओ. चिदम्बरनार (तूतीकोरिन) और पारादीप बंदरगाहों को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन हब नामित किया गया। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के जून 2025 के दिशा-निर्देशों के अनुसार अक्टूबर 2025 में यह मान्यता दी गई।

ये हब हाइड्रोजन उत्पादन और उपभोग के प्रमुख केंद्र होंगे। भारत ने 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 25 GW से अधिक सौर क्षमता वाला राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख अपस्ट्रीम आपूर्तिकर्ता है।