प्रकाशित: 17 सितंबर 2025राजस्थान
राजस्थान ने सहकारी समितियों के जरिए 152 मिलेट आउटलेट स्थापित किए, जो लक्ष्य से 4 गुना अधिक हैं
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के ज़रिए 152 मिलेट आउटलेट खोले, जो 34 के शुरुआती लक्ष्य से कहीं ज़्यादा हैं। 2025-26 राज्य बजट में घोषित इस पहल का मकसद ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ मोटे अनाज को 'पोषक, किफायती और टिकाऊ विकल्प' के रूप में बढ़ावा देना है।
ये आउटलेट राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ और जिला सहकारी उपभोक्ता समितियों द्वारा चलाए जा रहे हैं, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी मिलते हैं। मिलेट खेती के क्षेत्रफल में राजस्थान सभी भारतीय राज्यों में सबसे आगे है। भारत दुनिया के 38.4% मिलेट का उत्पादन करता है, जिसमें बाजरा, ज्वार और रागी प्रमुख किस्में हैं।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
जनजातीय गौरव वर्ष के संदर्भ में राजस्थान की कितनी प्रतिशत आबादी जनजातीय है?
व्याख्या · सही उत्तर Cराजस्थान की जनजातीय आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का 13.5% है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान ने सहकारी समितियों से कितने मिलेट आउटलेट स्थापित किए?
राजस्थान ने सहकारी समितियों से **152 मिलेट आउटलेट** स्थापित किए, जो **लक्ष्य से 4 गुना अधिक** है।
राजस्थान में मिलेट आउटलेट का लक्ष्य 4 गुना से अधिक होना क्यों महत्वपूर्ण है?
**ये आउटलेट Rajasthan State Cooperative Consumer Federation और District Cooperative Co के ज़रिए संचालित हैं**। यह मिलेट की मजबूत माँग और भारत के श्री अन्न प्रोत्साहन कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन को दर्शाता है।
सहकारी मिलेट आउटलेट राजस्थान के किसानों को कैसे लाभ पहुँचाते हैं?
**भारत के सभी राज्यों में मिलेट की खेती के क्षेत्रफल में राजस्थान सबसे आगे है**। सहकारी विपणन से बिचौलियों की भूमिका घटती है, किसानों को बेहतर कीमतें मिलती हैं और मिलेट की माँग स्थिर रहती है।
भारत की श्री अन्न पहल और राजस्थान का योगदान क्या है?
दुनिया के 38.4% मिलेट का उत्पादन भारत करता है, जिनमें बाजरा, ज्वार और रागी जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 में मिलेट को श्री अन्न के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया।
राजस्थान के सहकारी आउटलेट से कौन से मिलेट बढ़ावा दिए जाते हैं?
**International Year of Millets 2023 के बाद यह पहल भारत में पूरे साल मिलेट को बढ़ावा देने में मदद करती है**। बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य पारंपरिक अनाज को बढ़ावा दिया जाता है।