राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के ज़रिए 152 मिलेट आउटलेट खोले, जबकि शुरुआती लक्ष्य 34 आउटलेट का था। 2025-26 के राज्य बजट में घोषित इस पहल का मकसद ग्रामीण रोजगार पैदा करने के साथ-साथ मिलेट को 'पारंपरिक अनाज के पौष्टिक, किफायती और टिकाऊ विकल्प' के रूप में बढ़ावा देना है।

राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ और जिला सहकारी उपभोक्ता समितियाँ इन आउटलेट को चलाती हैं। यहाँ महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी उपलब्ध हैं। मिलेट की खेती के रकबे में राजस्थान देश के सभी राज्यों से आगे है। दुनिया में पैदा होने वाले मिलेट का 38.4% भारत में होता है; बाजरा, ज्वार और रागी इसकी प्रमुख किस्में हैं। अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के बाद यह पहल भारत में पूरे साल मिलेट को बढ़ावा देने के अभियान को आगे बढ़ाती है।