प्रकाशित: 7 जनवरी 2026टॉपिक
भारत सड़क निर्माण के लिए बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला पहला देश बना
भारत सड़क निर्माण के लिए जैव-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला विश्व का पहला देश बन गया। 7 जनवरी 2026 को घोषित यह उपलब्धि टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कृषि अपशिष्ट और बायोमास जैसे नवीकरणीय जैविक स्रोतों से प्राप्त जैव-बिटुमेन पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन का पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करता है।
यह नवाचार भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के सहयोगात्मक शोध से विकसित किया गया। पारंपरिक बिटुमेन के लिए कच्चे तेल का प्रसंस्करण जरूरी होता है, जबकि जैव-बिटुमेन में बायोमास सामग्रियों के थर्मोकेमिकल रूपांतरण का उपयोग होता है, जिससे सड़क निर्माण में कार्बन उत्सर्जन लगभग 30% कम होता है। यह तकनीक उन कृषि अवशेषों का उपयोग करती है जिन्हें अन्यथा खेतों में जला दिया जाता, इसलिए यह प्रदूषण और बुनियादी ढांचे, दोनों जरूरतों को साथ-साथ संबोधित करती है।
भारत के पास 64 लाख किलोमीटर से अधिक का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है, जिसके लिए हर साल लगभग 88 लाख टन बिटुमेन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भारत की बिटुमेन मांग का लगभग 50% आयात से पूरा होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर महत्वपूर्ण दबाव पड़ता है। जैव-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देते हुए इस आयात निर्भरता को धीरे-धीरे कम कर सकता है।
यह तकनीक भारतमाला परियोजना कार्यक्रम के तहत भारत के चल रहे राजमार्ग विस्तार के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। जैव-बिटुमेन टिकाऊपन और मौसम प्रतिरोध परीक्षणों में पारंपरिक बिटुमेन के बराबर प्रदर्शन करता है, इसलिए यह राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के लिए उपयुक्त है। व्यावसायिक उत्पादन सुविधा चावल की भूसी, गन्ने की खोई और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट सहित कई प्रकार के बायोमास फीडस्टॉक को संसाधित कर सकती है। भारत की यह उपलब्धि उसे टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों पर काम कर रहे अन्य विकासशील देशों के लिए हरित सड़क निर्माण तकनीक का संभावित निर्यातक बनाती है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनों
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
भारत किस तकनीक का उपयोग करके बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला पहला देश बन गया?
व्याख्या · सही उत्तर Bभारत कपास पुआल, बगास और गेहूं पुआल जैसे कृषि अपशिष्ट से पायरोलिसिस तकनीक का उपयोग करके बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला पहला देश बन गया। 15 कंपनियों ने CSIR पेटेंट लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बायो-बिटुमेन क्या है और भारत सड़क निर्माण के लिए इसका व्यावसायिक उत्पादन करने वाला पहला देश क्यों बना?
**बायो-बिटुमेन** कृषि अवशेषों जैसे **धान पुआल, कपास पुआल, बगैस और गेहूं के भूसे** से **पायरोलिसिस तकनीक** के जरिए बनाया जाने वाला **पेट्रोलियम बिटुमेन का जैव-आधारित विकल्प** है। केंद्रीय मंत्री **नितिन गडकरी** ने **7 जनवरी 2026** को **CSIR प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह** में घोषणा की कि भारत **दुनिया का पहला देश** बना जिसने इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया, और **14 उद्योगों** को तकनीक हस्तांतरित की गई।
भारत के पहले बायो-बिटुमेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग खंड का उद्घाटन कहाँ हुआ और इसे किसने विकसित किया?
भारत के पहले **बायो-बिटुमेन राष्ट्रीय राजमार्ग** खंड का उद्घाटन **नागपुर के मनसर में NH-44** पर हुआ। इसे **प्रज इंडस्ट्रीज** ने **CSIR-CRRI** और **NHAI** के सहयोग से विकसित किया। **नितिन गडकरी** ने **7 जनवरी 2026** को **CSIR प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह** में घोषणा की, जहाँ **14 उद्योगों** को व्यावसायिक उत्पादन और विस्तार के लिए तकनीक हस्तांतरित की गई।
भारत में बायो-बिटुमेन उत्पादन के लिए पायरोलिसिस तकनीक में कौन से कच्चे माल का उपयोग होता है?
भारत में बायो-बिटुमेन **कपास पुआल**, **बगैस (गन्ने का अवशेष)**, **गेहूं का भूसा** और **धान के पुआल** जैसे कृषि अपशिष्ट से **पायरोलिसिस तकनीक** के जरिए बनाया जाता है। **7 जनवरी 2026** को **14 उद्योगों** को व्यावसायिक उत्पादन और विस्तार के लिए तकनीक हस्तांतरित की गई। बायो-बिटुमेन, **जीवाश्म ईंधन से बने बिटुमेन** की जगह आंशिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
राजस्थान के 2.36 लाख किमी सड़क नेटवर्क को देखते हुए बायो-बिटुमेन कैसे फायदेमंद हो सकता है?
**राजस्थान** के **2.36 लाख किमी** से अधिक सड़क नेटवर्क में **बायो-बिटुमेन** अपनाने से **निर्माण लागत में काफी कमी** आ सकती है और **कृषि अवशेषों** (गेहूं पुआल, कपास पुआल) का उपयोग हो सकता है। भारत **7 जनवरी 2026** को पहला व्यावसायिक बायो-बिटुमेन उत्पादक देश बना (**नितिन गडकरी** की घोषणा)। पहला NH खंड **NH-44, मनसर, नागपुर** पर **प्रज इंडस्ट्रीज** ने **CSIR-CRRI और NHAI** के साथ बनाया।
जनवरी 2026 में नितिन गडकरी की घोषणा में CSIR-CRRI की क्या भूमिका थी?
**CSIR-CRRI (केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान)** ने **प्रज इंडस्ट्रीज** और **NHAI** के साथ मिलकर **NH-44, मनसर, नागपुर** पर भारत का पहला **बायो-बिटुमेन राष्ट्रीय राजमार्ग** खंड विकसित किया। **CSIR प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह** (8 जनवरी 2026) में **15 कंपनियों** को व्यावसायिक उत्पादन के लिए पेटेंट हस्तांतरित किए गए। **नितिन गडकरी** ने घोषणा की कि भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला **पहला देश** है।