भारत सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ को आईएसपीएस कोड के तहत बंदरगाहों के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन नामित किया है। यह बदलाव परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बंदरगाह सुरक्षा, समुद्री व्यापार, आंतरिक सुरक्षा और नियामकीय ढांचे का संबंध एक साथ दिखाई देता है। गृह मंत्रालय के लोकसभा उत्तर के अनुसार, जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा के नियमन के लिए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन डीजी शिपिंग ही निर्दिष्ट प्राधिकरण है। यह प्राधिकरण केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 की धारा 7 से जुड़ा है। इसलिए सीआईएसएफ की भूमिका को नियामक प्राधिकरण के रूप में नहीं, बल्कि आईएसपीएस ढांचे के भीतर मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन के रूप में समझना चाहिए।

आईएसपीएस कोड बंदरगाहों और जहाजों की सुरक्षा से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय ढांचा है। इस संदर्भ में सीआईएसएफ की भूमिका बंदरगाह सुरक्षा आकलन, सुरक्षा योजनाओं और मानकीकृत सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ती है। पीआईबी के अनुसार, सीआईएसएफ को बंदरगाह सुविधाओं के लिए सुरक्षा आकलन करने और बंदरगाह सुरक्षा योजनाएं तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे बंदरगाह सुरक्षा में एक जैसी प्रक्रिया, बेहतर समन्वय और जोखिम-आधारित तैयारी पर ज़ोर बढ़ता है।

RAS और UPSC प्रीलिम्स के लिए मुख्य पकड़ यह है कि संस्था और भूमिका में अंतर साफ़ रहे: डीजी शिपिंग नियामक प्राधिकरण है, जबकि सीआईएसएफ मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन है। मुख्य परीक्षा में यह विषय समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा, व्यापार सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुधारों से जोड़ा जा सकता है। स्टैटिक जीके में सीआईएसएफ का पूरा नाम केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और आईएसपीएस कोड का संबंध जहाज तथा बंदरगाह सुविधा सुरक्षा से याद रखना उपयोगी रहेगा।