26 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा दिवस के रूप में मनाया गया। यह दिवस UN महासभा के प्रस्ताव 77/327 से जुड़ा है और इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा की ओर न्यायसंगत और समावेशी बदलाव के लिए जागरूकता और कार्रवाई बढ़ाना है। परीक्षा के लिहाज से यह खबर पर्यावरण, विज्ञान-तकनीक, ऊर्जा नीति, अंतरराष्ट्रीय संगठन और सतत विकास लक्ष्य जैसे विषयों को एक साथ जोड़ती है।
भारत के संदर्भ में इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि देश ने गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता में तेज बढ़त दिखाई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत ने 2025 में 50% गैर-जीवाश्म स्थापित बिजली क्षमता का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया। 31 दिसंबर 2025 तक कुल स्थापित क्षमता 5,13,730 मेगावाट थी, जिसमें 2,66,788 मेगावाट यानी 51.93% गैर-जीवाश्म स्रोतों से थी। 31 जनवरी 2026 तक कुल स्थापित क्षमता 5,20,510.95 मेगावाट और गैर-जीवाश्म क्षमता 2,71,969.33 मेगावाट बताई गई। इससे मौजूदा समसामयिकी में भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रगति का ठोस आंकड़ा मिलता है। यहां एक सावधानी जरूरी है: ये आंकड़े स्थापित क्षमता के हैं, वास्तविक बिजली उत्पादन के नहीं; परीक्षा में दोनों को अलग-अलग समझना चाहिए।
RAS और UPSC प्रीलिम्स में इससे अंतरराष्ट्रीय दिवस, UN महासभा प्रस्ताव, ऊर्जा बदलाव और भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता पर सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह विषय ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण घटाने, जलवायु प्रतिबद्धताओं, विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों और न्यायसंगत बदलाव के बीच संतुलन से जुड़ता है। स्टैटिक जीके के लिए इसे नवीकरणीय ऊर्जा, सौर-ऊर्जा विस्तार, परमाणु ऊर्जा को गैर-जीवाश्म श्रेणी में गिनने और सतत विकास लक्ष्य-7 से जोड़कर पढ़ना उपयोगी रहेगा।
