इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण में ₹41,863 करोड़ के 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों से ₹2,58,152 करोड़ के उत्पादन और 33,791 प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसरों की उम्मीद है। पहले मंजूर 24 आवेदनों में ₹12,704 करोड़ का निवेश था; तीसरे चरण के बाद योजना के तहत कुल 46 आवेदन मंजूर हो चुके हैं और कुल निवेश ₹54,567 करोड़ हो गया है। यह संख्या परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकारी औद्योगिक नीति, घरेलू विनिर्माण, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता के कई आयाम एक साथ जुड़ते हैं।

मंजूर इकाइयाँ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैली हैं। उत्पादों में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर, लिथियम-आयन सेल, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांसीवर जैसे घटक शामिल हैं। इनके अलावा एल्युमिनियम एक्सट्रूजन, एनोड मटीरियल और कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी सामग्री भी शामिल है। इसलिए यह पहल मोबाइल, टेलीकॉम, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों के लिए आधारभूत महत्व रखती है।

RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में यह अपडेट भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मेक इन इंडिया, औद्योगिक नीति और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े प्रश्नों में काम आ सकता है। मुख्य परीक्षा में इसे विनिर्माण-आधारित वृद्धि और मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है। स्टैटिक जीके से इसका लिंक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आयात निर्भरता कम करने, रोजगार सृजन और राज्यों में औद्योगिक फैलाव से है। राजस्थान का नाम 8 राज्यों में शामिल होने से राज्य-स्तरीय परीक्षा में भी यह तथ्य सीधे पूछा जा सकता है।