हिन्दुस्तान टाइम्स ने 6 मई 2026 को रिपोर्ट किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत अर्धचालक मिशन के पहले चरण के तहत अंतिम दो अर्धचालक इकाइयों को मंजूरी दी, जिनमें संयुक्त निवेश 3,936 करोड़ रुपये है। परियोजनाओं का वित्तपोषण 2022 में शुरू हुए मिशन के लिए स्वीकृत 76,000 करोड़ रुपये के प्रावधान से किया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दोनों इकाइयां गुजरात में स्थापित होंगी। इन मंजूरियों के साथ मिशन के तहत आरंभिक परियोजनाओं की सूची 12 इकाइयों तक पहुंच गई है, जिनका कुल निवेश लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये है। बड़ी मंजूरी धोलेरा की 3,068 करोड़ रुपये की क्रिस्टल मैट्रिक्स परियोजना है, जिसे परिपक्व लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले तकनीक से अगली पीढ़ी के माइक्रो लाइट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले की ओर बदलाव से जोड़ा गया है। यह इकाई मिनी और माइक्रो लाइट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले में उपयोग होने वाले गैलियम नाइट्राइड वेफर बनाएगी। साथ ही उन्नत असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग भी करेगी। ये घटक बड़े वीडियो वॉल, संवर्धित और आभासी वास्तविकता प्रणालियों, स्टूडियो उत्पादन तथा विशेष रक्षा और चिकित्सा डिस्प्ले में उपयोग होते हैं। 60 एकड़ के संयंत्र से हर साल 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल और लाल-हरा-नीला गैलियम नाइट्राइड वेफर के 24,000 सेट बनने तथा करीब 1,600 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इसकी पैकेजिंग इकाई 18 महीनों में और यौगिक अर्धचालक निर्माण इकाई लगभग तीन वर्षों में पूरी हो सकती है। दूसरी मंजूरी सूरत में सुची सेमिकॉन की 868 करोड़ रुपये की आउटसोर्स्ड अर्धचालक असेंबली और परीक्षण इकाई है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले लीड फ्रेम और वायर-बॉन्ड पैकेज बनाएगी, जिसकी वार्षिक क्षमता 67.3 करोड़ छोटे आकार एकीकृत परिपथ और 36 करोड़ ट्रांजिस्टर आकार पैकेज होगी। वहां उत्पादन आठ से 10 महीनों में शुरू होने और लगभग 630 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया कि मंत्रिमंडल ने गुजरात की 3,936 करोड़ रुपये की दो अर्धचालक इकाइयों को मंजूरी दी, जिससे भारत अर्धचालक मिशन के पहले चरण की परियोजनाएं पूरी हुईं
हिन्दुस्तान टाइम्स ने 6 मई 2026 को बताया कि मंत्रिमंडल ने गुजरात की 3,936 करोड़ रुपये की दो अर्धचालक इकाइयों को मंजूरी दी। इन मंजूरियों के साथ भारत अर्धचालक मिशन के पहले चरण में 12 इकाइयों और लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के संचयी निवेश की सूची पूरी हो गई। परियोजनाओं में धोलेरा की डिस्प्ले पर केंद्रित इकाई और सूरत की आउटसोर्स्ड असेंबली व परीक्षण इकाई शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- मंत्रिमंडल ने गुजरात में 3,936 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश वाली दो अर्धचालक इकाइयों को मंजूरी दी।
- मंजूरियों से भारत अर्धचालक मिशन की आरंभिक सूची 12 इकाइयों तक पूरी हुई।
- मिशन के तहत संचयी निवेश लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।
- धोलेरा की 3,068 करोड़ रुपये की क्रिस्टल मैट्रिक्स परियोजना मिनी और माइक्रो लाइट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले के लिए गैलियम नाइट्राइड वेफर पर केंद्रित होगी।
- धोलेरा संयंत्र लगभग 1,600 प्रत्यक्ष रोजगार देगा और सालाना 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल बनाने की उम्मीद रखता है।
- सूरत की 868 करोड़ रुपये की सुची सेमिकॉन इकाई लीड फ्रेम और वायर-बॉन्ड पैकेज जैसे पैकेजिंग घटक बनाएगी।
- सूरत इकाई में उत्पादन आठ से 10 महीनों में शुरू होने और लगभग 630 प्रत्यक्ष रोजगार बनने की उम्मीद है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात की 2 अर्धचालक इकाइयों को स्वीकृति दी। उनमें स्वीकृत संयुक्त निवेश कितना था?
गुजरात की दो नई मंजूर इकाइयों का संयुक्त निवेश 3,936 करोड़ रुपये है। 76,000 करोड़ रुपये मिशन प्रावधान है, 1.64 लाख करोड़ रुपये मिशन का संचयी निवेश है और 868 करोड़ रुपये सूरत इकाई का निवेश है। इसलिए यही विकल्प सही माना जाएगा।
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंत्रिमंडल ने क्या मंजूर किया?
उसने गुजरात में 3,936 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश वाली दो अर्धचालक इकाइयों को मंजूरी दी।
आरंभिक मिशन सूची में अब कितनी इकाइयां हैं?
इन मंजूरियों के बाद आरंभिक सूची में अर्धचालक इकाइयों की संख्या 12 हो जाती है।
धोलेरा परियोजना किस पर केंद्रित है?
क्रिस्टल मैट्रिक्स परियोजना मिनी और माइक्रो लाइट एमिटिंग डायोड डिस्प्ले के लिए गैलियम नाइट्राइड वेफर और उन्नत पैकेजिंग बनाएगी।
सूरत इकाई क्या बनाएगी?
यह लीड फ्रेम और वायर-बॉन्ड पैकेज जैसे अर्धचालक पैकेजिंग के घटक बनाएगी।
दोनों इकाइयों से रोजगार की क्या उम्मीद है?
धोलेरा इकाई लगभग 1,600 और सूरत इकाई लगभग 630 प्रत्यक्ष रोजगार दे सकती है।
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