प्रकाशित: 24 फ़रवरी 2026Down to Earthपर्यावरण
सर्वोच्च न्यायालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को देशभर में लागू करने का आदेश दिया, अनुपालन की समयसीमा 31 मार्च तय की
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 24 फरवरी 2026 के आसपास दिए एक महत्वपूर्ण आदेश में देशभर के सभी शहरी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के बारे में तुरंत और प्रभावी ढंग से जानकारी दें। न्यायालय ने 31 मार्च 2026 तक अनुपालन की सख्त समयसीमा तय की और स्थानीय निकायों को नियम लागू करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया।
पीठ ने सार्वजनिक जवाबदेही की व्यवस्था बनाने का भी निर्देश दिया। इसके तहत वार्ड पार्षदों और महापौरों सहित निर्वाचित प्रतिनिधियों को मुख्य समन्वयक नामित किया जाएगा। वे यह सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार होंगे कि उनके क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले इन नियमों का पालन करें। इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्वाचित स्थानीय प्रतिनिधियों की लोकतांत्रिक जवाबदेही के सहारे ज़मीनी स्तर पर नियमों का पालन मज़बूत करना है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अनुसार, बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों में 100 से अधिक घरों वाले आवासीय परिसर तथा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करने वाले वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, होटल, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इन संस्थाओं को केवल नगरपालिका की कचरा संग्रह सेवाओं पर निर्भर रहने के बजाय स्रोत पर ही कचरे को अलग करना, उससे कंपोस्ट बनाना और अन्य तरीकों से उसका उपचार करना होगा।
सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप बताता है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने से पहले ही नियमों का व्यापक पालन न होने को लेकर न्यायपालिका की चिंता बढ़ रही थी। भारत में हर साल लगभग 6.2 करोड़ टन ठोस अपशिष्ट पैदा होता है, जिसमें से केवल एक हिस्से का ही वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण होता है। इस समस्या का सबसे अधिक बोझ शहरी क्षेत्रों पर है। शहरी स्थानीय निकायों की सीमित क्षमता, बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों में जागरूकता की कमी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा लगातार बाधाएं बनी हुई हैं। न्यायालय का आदेश प्रत्यक्ष न्यायिक निगरानी, स्पष्ट समयसीमा और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही के ज़रिए इस स्थिति को बदलने की कोशिश करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 क्या हैं?
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत अधिसूचित हैं। ये भारत में ठोस अपशिष्ट के संग्रह, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान को नियंत्रित करते हैं। ये नियम बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों, शहरी स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों की ज़िम्मेदारियां तय करते हैं, ताकि कचरे का प्रबंधन वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से हो।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले कौन हैं?
बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों में 100 से अधिक इकाइयों वाले आवासीय अपार्टमेंट तथा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करने वाले वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, होटल, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। उन्हें कचरे को अलग करके और उसका उपचार करके स्रोत पर ही उसका प्रबंधन करना होगा।
सर्वोच्च न्यायालय को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू कराने में हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा?
पहले के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम एक दशक पहले अधिसूचित किए गए थे, फिर भी स्थानीय निकायों और बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों ने उनका ठीक से पालन नहीं किया। भारत में हर साल लगभग 6.2 करोड़ टन ठोस अपशिष्ट पैदा होता है, जबकि उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने नियमों का पालन न होने का यह सिलसिला तोड़ने के लिए बाध्यकारी समयसीमाएं और जवाबदेही की व्यवस्था तय की।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को क्या भूमिका दी गई है?
वार्ड पार्षदों और महापौरों सहित निर्वाचित प्रतिनिधियों को मुख्य समन्वयक नामित किया गया है। वे अपने-अपने क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन कराने के लिए ज़िम्मेदार हैं। वे अपनी लोकतांत्रिक जवाबदेही का इस्तेमाल करके स्थानीय स्तर पर नियम लागू कराने में मदद करेंगे।
31 मार्च 2026 की समयसीमा का क्या महत्व है?
न्यायालय ने नियमों के अनुपालन के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय की है। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों को अपने अधिकार क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बारे में जानकारी देनी होगी। इससे न्यायपालिका को अनुपालन की समीक्षा करने और चूक करने वाले स्थानीय निकायों के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने का स्पष्ट आधार मिलता है।